Last Updated May - 28 - 2026, 12:09 PM | Source : Fela News
RBI New Proposal: RBI के नए ट्रांजेक्शन नियमों पर बैंक कर्मचारियों ने चिंता जताई है. प्रस्ताव के मुताबिक सिर्फ पूरी तरह वेरिफाइड खातों से ही ₹25 लाख से ज्यादा का ऑनलाइन ट्रांसफर संभव होगा, जिससे ग्राहकों की परेशानी बढ़ सकती है.
RBI New Proposal: ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर स्कैम पर लगाम लगाने के लिए Reserve Bank of India ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. RBI ने बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी लागू करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इस प्लान ने अब बैंकिंग सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है. कई बैंकों का कहना है कि अगर यह नियम लागू हुआ तो UPI और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की स्पीड पर सीधा असर पड़ सकता है.
क्या है बैंकों की सबसे बड़ी चिंता?
बैंकों का कहना है कि RBI द्वारा तय की गई ₹10,000 की लिमिट काफी कम है. उनका मानना है कि इसे बढ़ाकर कम से कम ₹25,000 किया जाना चाहिए. बैंक कर्मचारियों के मुताबिक, छोटी रकम पर भी 1 घंटे की देरी लागू होने से आम लोगों को इमरजेंसी पेमेंट, बिल भुगतान और रोजमर्रा के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में परेशानी हो सकती है.
एक वरिष्ठ सरकारी बैंक अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि टैक्स पेमेंट और इमरजेंसी ट्रांजैक्शन को इस नियम से बाहर रखा जाना चाहिए. साथ ही छोटे बैंकों के लिए ‘किल स्विच’ जैसी एडवांस सिक्योरिटी सुविधा लागू करना भी आसान नहीं होगा.
RBI ने क्या दिया है प्रस्ताव?
RBI ने हाल ही में साइबर फ्रॉड रोकने के लिए एक चर्चा पत्र जारी किया था, जिसमें कई बड़े बदलाव सुझाए गए हैं. इनमें:
• बड़े ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी
• हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच
• सिर्फ भरोसेमंद खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की अनुमति
• ग्राहकों को बड़े डिजिटल पेमेंट पर ज्यादा कंट्रोल देना
₹25 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर भी सवाल
पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि ₹25 लाख से ज्यादा रकम पाने वाले खातों की अलग से जांच वाला नियम व्यवहारिक नहीं है. उनका मानना है कि फ्रॉड करने वाले लोग कई छोटे खातों का इस्तेमाल कर आसानी से इस सिस्टम को चकमा दे सकते हैं.
तेजी से बढ़ रहे हैं डिजिटल फ्रॉड
भारत में डिजिटल फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में करीब 28 लाख साइबर धोखाधड़ी के मामले सामने आए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 24 लाख था. वहीं फ्रॉड की रकम बढ़कर लगभग ₹22,931 करोड़ तक पहुंच गई है. ऐसे में RBI अब डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े बदलावों पर विचार कर रहा है.
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