Last Updated Feb - 02 - 2026, 10:44 AM | Source : Fela News
बजट 2026 में सैलरीड मिडिल क्लास और युवाओं को सबसे ज्यादा निराशा हाथ लगी है. इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया और महंगाई के बावजूद कर राहत न मिलने से
Budget 2026: बजट 2026 को समग्र रूप से देखें तो यह सरकार की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें तात्कालिक राहत की बजाय लंबी अवधि के विकास पर ज्यादा जोर दिया गया है. वित्त मंत्री ने पूंजीगत खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देते हुए संकेत दिया कि विकास का रास्ता बड़े प्रोजेक्ट्स से होकर जाएगा.
इकोनॉमी के लिए सकारात्मक संकेत
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश, आयुर्वेदिक AIIMS और मेडिकल हब जैसे फैसलों को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. इसके साथ ही कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को ड्यूटी फ्री करना और रिवाइज्ड ITR की समय-सीमा बढ़ाना आम लोगों के लिए सीमित लेकिन व्यावहारिक राहत है.
मिडिल क्लास और युवाओं में निराशा
वहीं दूसरी ओर, सैलरीड मिडिल क्लास और युवाओं को बजट से सबसे ज्यादा निराशा हुई है. इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होना और महंगाई के दबाव के बावजूद कर राहत न मिलना मध्यम वर्ग के लिए बड़ा झटका है. ‘यूथ-फर्स्ट’ के दावों के बावजूद रोजगार सृजन के लिए नई ठोस योजनाओं की कमी साफ नजर आई.
इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार पर असर का खतरा
शहरी विकास, मेट्रो और इंटर्नशिप जैसी योजनाओं में कटौती से शहरों में रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर की गति धीमी पड़ने की आशंका है. इसके अलावा F&O ट्रेड पर STT बढ़ाने से रिटेल निवेशकों में नाराजगी दिखी, जिसका असर बजट के बाद शेयर बाजार की गिरावट में भी नजर आया.
कुल मिलाकर, बजट 2026 “कल की अर्थव्यवस्था” को मजबूत करने की कोशिश करता दिखता है, लेकिन “आज की नौकरी, आज की आय और आज की महंगाई” से जूझ रहे लोगों को अपेक्षित राहत नहीं दे पाया. सरकार विकास की मजबूत नींव रखने का दावा कर रही है, लेकिन उसका लाभ आम लोगों तक कितनी जल्दी पहुंचेगा, यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है.
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