Last Updated Jan - 30 - 2026, 04:40 PM | Source : Fela News
भारत का पहला आम बजट आरके षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था। सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम दर्ज है।
आजाद भारत में पहला आम बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। यह बजट देश के पहले वित्त मंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने संविधान लागू होने से पहले अंतरिम सरकार के तहत संसद में रखा था। उस समय देश विभाजन के बाद आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था और बजट का मुख्य फोकस राजस्व व्यवस्था को स्थिर करने और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर था। इस ऐतिहासिक बजट को स्वतंत्र भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला पहला कदम माना जाता है।
इसके बाद भारत में कई वित्त मंत्रियों ने बजट पेश किए और कुछ ने लंबे समय तक इस जिम्मेदारी को संभाला। सवाल उठाए जाते हैं कि अब तक सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड किसके नाम है। इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का नाम सबसे ऊपर आता है। मोरारजी देसाई ने अपने राजनीतिक करियर के दौरान कुल 10 बार आम बजट पेश किए थे। वे 1959 से 1964 तक और फिर 1967 से 1969 तक वित्त मंत्री रहे। बताया जाता है कि उनके कार्यकाल में आर्थिक अनुशासन और सख्त नीतियों पर विशेष जोर दिया गया था।
इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री पी. चिदंबरम भी लंबे समय तक वित्त मंत्रालय संभालने वाले नेताओं में शामिल रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग सरकारों में कुल 9 बार बजट पेश किया। वहीं प्रणब मुखर्जी ने भी वित्त मंत्री के रूप में 8 बजट पेश किए और आर्थिक नीतियों में अहम भूमिका निभाई।
वर्तमान समय की बात करें तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम भी इस सूची में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 2019 से लगातार बजट पेश किए हैं और यूनियन बजट 2026 उनके कार्यकाल का एक और महत्वपूर्ण बजट माना जा रहा है। यदि वे अपना कार्यकाल पूरा करती हैं, तो वे भी सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले वित्त मंत्रियों की सूची में शीर्ष स्थानों में शामिल हो सकती हैं।
वहीं दूसरी ओर, बजट पेश करने की परंपरा और उसका स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है। पहले बजट शाम के समय पेश किए जाते थे, जिसे बाद में सुबह के समय लाया गया। इसके साथ ही टैक्स व्यवस्था, कल्याण योजनाएं और विकास मॉडल भी लगातार बदलते रहे हैं।
कुल मिलाकर, भारत के बजट इतिहास में कई वित्त मंत्रियों ने अहम भूमिका निभाई है। आजाद भारत के पहले बजट से लेकर अब तक, यह प्रक्रिया देश की आर्थिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक सोच को दर्शाती रही है।
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