Last Updated May - 27 - 2026, 12:12 PM | Source : Fela News
Inflation Alert: तेल की बढ़ती कीमतें अब आम जनता की जेब पर भारी पड़ सकती हैं. इकोनॉमिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि इससे महंगाई बढ़ेगी, लोन महंगे होंगे और RBI भी सख्त कदम उठा सकता है.
Inflation Alert:देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले सिर्फ 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है. वहीं अब अर्थशास्त्रियों ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में हालात और मुश्किल हो सकते हैं. बढ़ती ईंधन कीमतों और आयात शुल्क में इजाफे के चलते महंगाई दर 5% के पार जा सकती है. यही वजह है कि अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है. इसके साथ ही सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों का असर सिर्फ ईंधन या ज्वेलरी बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर देशभर में रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी देखने को मिलेगा.
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं तो ट्रांसपोर्टेशन लागत तेजी से बढ़ जाती है. इसका असर सीधे सब्जियों, दूध, राशन, फल, खाद्य पदार्थों और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ता है. माल ढुलाई महंगी होने से कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने लगती हैं. यही वजह है कि आम आदमी का मासिक बजट बिगड़ने लगता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, जून 2026 तक खुदरा महंगाई दर यानी CPI Inflation बढ़कर 5% तक पहुंच सकती है. अगर ऐसा हुआ तो RBI के सामने भी नई चुनौती खड़ी हो सकती है. फिलहाल रिजर्व बैंक हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है.
बार्कलेज इंडिया की चीफ इकोनॉमिस्ट आस्था गुदवानी का कहना है कि जून में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में RBI फिलहाल रेपो रेट में बदलाव नहीं कर सकता. हालांकि अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही और 5% के ऊपर पहुंच गई, तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI पर पड़ सकता है.
अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि मौजूदा महंगाई सिर्फ मांग की वजह से नहीं बल्कि सप्लाई और ईंधन लागत से जुड़ी हुई है. ऐसे में सिर्फ ब्याज दरें बढ़ाने से तुरंत राहत मिलना मुश्किल होगा. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी भारत के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई हैं.
कई एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है. साथ ही आर्थिक विकास दर में भी गिरावट की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में आने वाले समय में आम लोगों को महंगाई का और बड़ा झटका लग सकता है.
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