Last Updated Aug - 18 - 2025, 03:10 PM | Source : Fela News
लगातार बढ़ती महंगाई और खर्चों ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ा दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या आम लोगों की जेब वाकई खाली हो रही है या हालात संभल सकते हैं।
भारत की मिडिल क्लास अब वित्तीय रूप से बुरी तरह दबाव में है, और इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं: stagnant income (वेतन बढ़ोतरी न होना), automation-driven job losses (ऑटोमेशन से रोजगार में कटौती), और economic slowdown (आर्थिक मंदी)। — यह चेतावनी दी है निवेश विशेषज्ञ सौरभ मुखर्जी ने।
बहुत सी जानकारियाँ इस वित्तीय असंतुलन की गंभीरता को उजागर कर रही हैं:
घरेलू कर्ज़ में तेज़ी: 2020 की तुलना में घरों का कर्ज़ जीडीपी के 35% से बढ़कर 43% हो गया है, जबकि बचत के स्तर 50 साल के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
मध्य-वर्ग दबाव में: Bengaluru के एक CEO का कहना है कि “EMIs, महंगाई और बचत की कमी मिडिल क्लास को धीरे-धीरे दबा रही है।”
बीते एक दशक में आमदनी में कोई वृद्धि नहीं: सालाना ₹5 लाख से ₹1 करोड़ कमाने वाले वर्ग की सैलेरी में 10 साल में वास्तविक बढ़ोतरी नहीं हुई लेकिन खर्च बढ़ा है।
मिडिल क्लास का पैसा सिर्फ खत्म नहीं हो रहा, यह दबाव के मकड़ जाल में फँसता जा रहा है, जो आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा दोनों को चुनौती दे रहा है।