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मिडिल क्लास की कमज़ोर जेब से कंपनियों के मुनाफ़े पर असर

मिडिल क्लास की कमज़ोर जेब से कंपनियों के मुनाफ़े पर असर

Last Updated Aug - 19 - 2025, 03:39 PM | Source : Fela News

मिडिल क्लास की बढ़ती खर्चों से जेब कमजोर हुई है। इसकी वजह से उनकी खरीद क्षमता घटी और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ने लगा है।
मिडिल क्लास की कमज़ोर जेब से कंपनियों के मुनाफ़े पर असर
मिडिल क्लास की कमज़ोर जेब से कंपनियों के मुनाफ़े पर असर

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि दिवाली 2023 के बाद से कॉरपोरेट मुनाफ़े की रफ्तार बुरी तरह प्रभावित हुई है और इसकी सबसे बड़ी वजह मिडिल क्लास की घटती खपत है। कंपनियों की आय इसलिए फिसल रही है क्योंकि आम भारतीय परिवारों की जेब खाली हो रही है।

सौरभ मुखर्जी का कहना है कि व्हाइट कॉलर नौकरियों में कमी, वास्तविक वेतन में गिरावट और एआई का बढ़ता असर मिडिल क्लास की आर्थिक ताकत को कमज़ोर कर रहा है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक FY24 में घरेलू बचत जीडीपी के मुकाबले 1977 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं खपत, जो जीडीपी का 60% है, 2021-23 से लगातार गिर रही है। एसयूवी, घर और ट्रैवल जैसे सेक्टर, जिनमें पहले तेज़ उछाल था, अब मांग घटने लगी है।

निफ्टी में सूचीबद्ध कंपनियों ने FY25 में आय में सबसे तेज़ गिरावट दर्ज की। भारत के लगभग 4 करोड़ व्हाइट कॉलर कर्मचारी सीधे तौर पर करीब 20 करोड़ नौकरियां पैदा करते हैं। ऐसे में अगर उनकी आय और रोजगार में सुधार नहीं हुआ, तो न केवल मिडिल क्लास बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि पर भी लंबे समय तक दबाव बना रह सकता है।

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