Last Updated Oct - 30 - 2025, 04:02 PM | Source : Fela News
वैश्विक बाजार में शांति और आर्थिक स्थिरता लौटने के संकेतों के बीच अब सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाल
दुनियाभर में बढ़ते टैरिफ, युद्ध और राजनीतिक तनाव ने पिछले कुछ सालों में सोने की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया था। लेकिन अब हालात धीरे-धीरे बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच नए व्यापार समझौते की चर्चा है, वहीं रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास युद्धों में भी युद्धविराम की संभावनाएं बन रही हैं। अगर ये सौदे और सुलहें तय हो जाती हैं, तो बाजार में स्थिरता लौटेगी और सोने का दबदबा घट सकता है।
कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही वैश्विक अस्थिरता घटेगी, निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) से निकलकर फिर शेयर बाजारों की ओर लौटेंगे। इससे सोने और चांदी दोनों की कीमतों में 10–15% तक गिरावट देखी जा सकती है। भारत में जहां सोने का दाम फिलहाल 70 से 75 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच चल रहा है, वहीं ये स्तर घटकर 60–65 हजार तक आ सकता है।
इसके अलावा, अमेरिका द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती, डॉलर की मजबूती और आयात शुल्क में सुधार जैसे कारक भी गोल्ड प्राइस पर असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर डॉलर मजबूत होता है और क्रूड ऑयल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो सोने का ग्लोबल सपोर्ट लेवल टूट सकता है।
हालांकि, भारत में त्योहार और शादी के सीजन के चलते घरेलू मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट तेज हुई, तो घरेलू स्तर पर भी सोने के रेट नीचे आ सकते हैं।
इस समय निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि अगले कुछ महीनों में वैश्विक शांति समझौतों, ट्रेड डील्स और जियोपॉलिटिकल अपडेट्स पर ही सोने की असली दिशा निर्भर करेगी। अगर सब कुछ शांत रहा, तो शायद सोने की चमक कुछ फीकी पड़ सकती है।