Last Updated Jan - 19 - 2026, 04:14 PM | Source : Fela News
आगामी बजट में टैक्स रूल्स में बड़ा बदलाव होने की अटकलें तेज हैं। खासकर सैलरी वालों के लिए यह खबर बड़ी मायने रखती है कि क्या पुराने टैक्स रेजीम को बंद किया जा सक
Budget 2026 से पहले ही टैक्स सिस्टम को लेकर चर्चा गर्म हो गई है। पिछले कुछ सालों में सरकार ने नए टैक्स रेजीम को बढ़ावा दिया है और पुरानी कटौतियों वाले रेजीम की लोकप्रियता घटती गई है। अब बाजार में यह बात चल रही है कि Budget 2026 में पुराना टैक्स रेजीम यानी Old Tax Regime को बंद किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो सैलरी वालों के लिए फायदे और नुकसान दोनों की स्थिति बन सकती है।
पुराना टैक्स रेजीम उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है जो टैक्स में कई तरह की कटौतियों (deductions) का फायदा उठाते हैं। जैसे कि 80C के तहत निवेश, होम लोन की ब्याज छूट, मेडिकल इंश्योरेंस, और HRA जैसी छूटें। वहीं नया टैक्स रेजीम कम स्लैब और कम टैक्स रेट के साथ आता है, लेकिन इसमें अधिकांश कटौतियां नहीं मिलतीं। इसलिए हर व्यक्ति के लिए सही रेजीम अलग हो सकता है।
अगर Budget 2026 में पुराने रेजीम को खत्म किया गया, तो सैलरी वालों के लिए यह चुनना आसान हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों की बचत पर असर भी पड़ सकता है। खासकर उन लोगों को नुकसान हो सकता है जो पुराने रेजीम में 80C और अन्य छूटों के जरिए टैक्स बचाते थे। वहीं, जो लोग ज्यादा कटौती नहीं लेते और सीधे सैलरी पर टैक्स देते हैं, उनके लिए नया रेजीम बेहतर साबित हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अचानक पुराना रेजीम खत्म नहीं करेगी। ऐसा कदम बड़े बदलाव के साथ ही संभव है, ताकि आम लोगों को समय मिले और वे अपनी टैक्स प्लानिंग बदल सकें। कई बार सरकार टैक्स रेजीम को सरल बनाने के लिए विकल्पों को कम करती है, लेकिन साथ में अन्य राहत भी देती है।
सैलरी वालों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि उन्हें किस रेजीम में कितना फायदा होगा। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि उनकी सैलरी, निवेश, होम लोन, और अन्य कटौतियों का कुल असर कितना है। अगर कटौतियों के बिना भी टैक्स रेट कम होता है, तो नया रेजीम बेहतर हो सकता है। लेकिन अगर कटौतियों से बचत ज्यादा है, तो पुराने रेजीम का फायदा बना रह सकता है।
कुल मिलाकर Budget 2026 में टैक्स रेजीम को लेकर कोई भी बड़ा फैसला सैलरी वालों की वित्तीय योजना पर असर डालेगा। अभी यह सिर्फ अटकलें हैं, लेकिन बजट आते ही तस्वीर साफ हो जाएगी। तब यह पता चलेगा कि क्या सरकार ने पुराने रेजीम को खत्म कर सैलरी वालों को नया टैक्स ढांचा अपनाने पर मजबूर किया, या फिर पुराने रेजीम को बनाए रखते हुए नए विकल्प दिए।
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