Last Updated Aug - 18 - 2025, 01:30 PM | Source : Fela News
ग्रेटर नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में हुई इस दर्दनाक घटना ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षिक दबाव और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए
15 अगस्त की रात ग्रेटर नोएडा के एक निजी हॉस्टल में यह दर्दनाक घटना घटी। 24 वर्षीय बी.टेक छात्र शिवम डे, जो शारदा विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में दाख़िल थे, फांसी पर लटके हुए पाए गए।
उनका भावुक सुसाइड नोट इस ओर इशारा करता है कि वह भीतर से गहरे तनाव और आत्म-संदेह से जूझ रहे थे। उसमें उन्होंने खुद को “एक अच्छा छात्र” बताते हुए लिखा कि अब वह शैक्षणिक अपेक्षाओं का बोझ और नहीं उठा सकते। अपने अंतिम संदेश में उन्होंने विश्वविद्यालय से यह भी आग्रह किया कि उनके बचे हुए शुल्क को माता-पिता को लौटा दिया जाए, जो कि उनके लिए अंतिम क्षणों में भी गहरी चिंता का संकेत था।
विश्वविद्यालय के अनुसार, शिवम न्यूनतम सीजीपीए बनाए रखने में असफल रहे थे, जो तीसरे वर्ष में जाने के लिए आवश्यक था। उन्हें परीक्षा दोबारा देने और कम शुल्क पर पुनः पंजीकरण (re-registration) करने के अवसर दिए गए, लेकिन वह कक्षाओं में नहीं लौटे। उनके मेंटर द्वारा इंटर्नशिप और मेकअप परीक्षा जैसी कोशिशों के बावजूद उन्हें मदद नहीं मिल सकी।
शिवम के नोट में एक व्यापक संदेश भी था:
“अगर यह देश महान बनना चाहता है, तो असली शिक्षा प्रणाली से शुरुआत करें।”
उन्होंने अपनी मृत्यु को व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए अधिकारियों से किसी को भी ज़िम्मेदार न ठहराने की अपील की।
यह त्रासदी हाल ही में हुई एक अन्य कैंपस आत्महत्या की गूंज भी है, जिसमें एक बीडीएस छात्रा ने अपने सुसाइड नोट में संकाय (फैकल्टी) पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उस घटना से गिरफ्तारी हुई और व्यापक आक्रोश फैला।
दोनों घटनाओं को देखें तो साफ़ है कि छात्रों, परिवारों और संस्थानों के बीच बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और खुला संवाद स्थापित करने की सख़्त ज़रूरत है।