Last Updated Mar - 19 - 2026, 05:26 PM | Source : Fela News
CBSE ने मिडिल ईस्ट में रद्द हुई 10वीं परीक्षाओं के बाद नई असेसमेंट स्कीम लागू की है। इस व्यवस्था के तहत अब छात्रों का रिजल्ट तय फॉर्मूले से तैयार किया जाएगा, जिससे उनकी अनिश्चितता खत्म होगी।
मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालातों के कारण CBSE ने 10वीं बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। इस फैसले का असर बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई में पढ़ रहे छात्रों पर पड़ा, जिससे स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों में रिजल्ट को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
अब बोर्ड ने इस असमंजस को खत्म करने के लिए एक विशेष असेसमेंट स्कीम जारी की है। इस नई व्यवस्था के तहत जिन परीक्षाओं का आयोजन पहले ही हो चुका है, उनके नंबरों और तय फॉर्मूले के आधार पर बाकी सब्जेक्ट्स के नंबर तय किए जाएंगे। इससे छात्रों को अपने रिजल्ट को लेकर स्पष्टता और राहत मिलेगी।
10वीं बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। इस दौरान मैथ्स, इंग्लिश, साइंस जैसे मुख्य विषयों के अलावा लैंग्वेज और स्किल-बेस्ड सब्जेक्ट्स की परीक्षाएं भी हो चुकी थीं। हालांकि सभी छात्रों ने सभी परीक्षाएं नहीं दी थीं, इसलिए रिजल्ट को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई थी।
बोर्ड ने बताया कि रिजल्ट तैयार करने के लिए एक तय फॉर्मूला अपनाया जाएगा। जिन छात्रों ने सभी परीक्षाएं दी हैं, उनका रिजल्ट उनके वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर बनेगा।
1. चार परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए उनके बेस्ट तीन सब्जेक्ट्स के औसत से बाकी विषयों के नंबर तय होंगे।
2. तीन परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए बेस्ट दो सब्जेक्ट्स का औसत लागू होगा।
3. दो परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए उन्हीं दो सब्जेक्ट्स के औसत से बाकी विषयों के नंबर दिए जाएंगे।
प्राइवेट और कंपार्टमेंट कैटेगरी के छात्रों के लिए भी अलग व्यवस्था है। अगर किसी छात्र ने केवल 1 या 2 परीक्षाएं दी हैं, तो उनका रिजल्ट उन्हीं के आधार पर तैयार होगा। जिनके पेपर बाकी हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट के छात्रों का रिजल्ट अन्य छात्रों के साथ ही जारी किया जाएगा। इसके अलावा, छात्र अपने नंबरों में सुधार करने के लिए एक अतिरिक्त अवसर भी पा सकेंगे, जिससे भविष्य में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।
इस नई योजना से मिडिल ईस्ट में पढ़ रहे छात्रों को अब अपने रिजल्ट को लेकर स्पष्टता मिली है और वे अपनी पढ़ाई और करियर की योजना आसानी से बना सकते हैं। बोर्ड का यह कदम छात्रों की चिंता कम करने और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए अहम माना जा रहा है।
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