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एग्जाम कॉपियों ने बिगाड़ा DU प्रोफेसर का मूड

एग्जाम कॉपियों ने बिगाड़ा DU प्रोफेसर का मूड

Last Updated Feb - 23 - 2026, 06:05 PM | Source : Fela News

दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर का वीडियो वायरल है, जिसमें उन्होंने छात्रों से परीक्षा कॉपियों में फालतू और अजीब जवाब लिखने पर मजाकिया लेकिन गंभीर अपील की.
एग्जाम कॉपियों ने बिगाड़ा DU प्रोफेसर का मूड
एग्जाम कॉपियों ने बिगाड़ा DU प्रोफेसर का मूड

दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक असिस्टेंट प्रोफेसर का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जांचते समय छात्रों की लिखावट और जवाबों को देखकर अपनी नाराजगी और परेशानी जाहिर करती नजर आ रही हैं.

हालांकि उनका अंदाज हल्का-फुल्का और मजाकिया है, लेकिन संदेश बेहद गंभीर है- पढ़ाई को गंभीरता से ले और आंसरशीट में 'क्रिएटिविटी दिखाने के नाम पर फालतू बातें न लिखें.

 
 
 
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वीडियो में प्रोफेसर शिखा शर्मा हाथ जोड़कर छात्रों से अपील करती दिखाई देती हैं. वह कहती हैं, "मेरी डीयू के सभी स्टूडेंट्स से गुजारिश है, ये अत्याचार हम शिक्षकों पर मत करो." उनकी बातों से साफ झलकता है कि कोपियां जांचते समय उन्हें किस तरह के जवाब पढ़ने पड़ रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ छात्र सवालों के जवाब देने के बजाय फिल्म 'कृष' का गाना लिख रहे हैं, तो कुछ पन्ने भरने के लिए सिर्फ दो-तीन शब्द बार-बार दोहरा रहे हैं.

प्रोफेसर ने यह भी बताया कि कई कॉपियों में लिखावट इतनी खराब है कि समझना मुश्किल हो जाता है कि छात्र कहना क्या चाहता है. ऐसे में मूल्यांकन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. उन्होंने छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि सिर्फ 7-8 पन्ने भर देने से अच्छे अंक नहीं मिलते. जरूरी यह है कि जो भी लिखा जाए, वह सही, सटीक और विषय से जुड़ा हो.

वीडियो के अंत में उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, 'मेरा मूड खराब हो गया है, कृपया पढ़ना शुरू कर दो." उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है और लोग इसे एक रियलिटी चेक के रूप में देख रहे हैं.

कई यूजर्स ने मजेदार कमेंट्स भी किए. किसी ने लिखा, "लगता है मेरी आंसरशीट मैडम के पास पहुंच गई, तो किसी ने कहा, "इस बार माफ कर दीजिए, अगली बार से गाना नहीं लिखूंगा."

हालांकि इस पूरे मामले में एक बड़ा संदेश भी छिपा है. परीक्षा केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह छात्र की समझ और मेहनत का आकलन करने का माध्यम है. अगर छात्र सिर्फ पन्ने भरने को ही लक्ष्य बना लें, तो वे खुद अपने भविष्य के साथ समझौता कर रहे होते हैं. प्रोफेसर की अपील यही बताती है कि गुणवत्ता मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण है.

यह वीडियो छात्रों और शिक्षकों के बीच के रिश्ते को भी एक अलग नजरिए से दिखाता है. जहां एक ओर शिक्षक मूल्यांकन के दौरान जिम्मेदारी निभाते हैं, वहीं छात्रों की लापरवाही उन्हें निराश कर सकती है. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने हंसी के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर किया है कि परीक्षा में ईमानदारी और तैयारी कितनी जरूरी है.

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