Last Updated Aug - 15 - 2025, 12:52 PM | Source : Fela News
79वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन में भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक विकास और न्याय और समानता के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाल
भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक भावपूर्ण संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने देश की यात्रा को औपनिवेशिक दासता से लेकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र बनने तक के सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने 15 अगस्त के महत्व पर जोर दिया — यह वह दिन है जो अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों और बलिदानों की गूंज है, जिन्होंने एक स्वतंत्र भारत का स्वप्न देखा था। उनके अडिग संकल्प ने उस सपने को हकीकत में बदला और आज राष्ट्र इस कठिन संघर्ष से अर्जित स्वतंत्रता का उत्साहपूर्वक जश्न मना रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत के इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय — विभाजन — को भी याद किया, जिसने अपार पीड़ा और विस्थापन को जन्म दिया। उन्होंने पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और इस त्रासदी से बने स्थायी घावों को स्वीकार किया। इन चुनौतियों के बावजूद, राष्ट्र की दृढ़ता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है।
अपने संदेश के केंद्र में उन्होंने भारत के लोकतंत्र के चार स्तंभ — न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व — को रखा। संविधान में निहित ये सिद्धांत राष्ट्र को एक अधिक समावेशी और समानता-आधारित भविष्य की ओर अग्रसर करते रहते हैं। राष्ट्रपति ने देश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख किया, जिसमें 6.5% की जीडीपी वृद्धि और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निर्यात में वृद्धि शामिल है।
इसके साथ ही, उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण की सराहना की, और उन उदाहरणों का उल्लेख किया, जहां महिलाओं ने सेना और खेल समेत विभिन्न क्षेत्रों में बाधाओं को तोड़ा है। उनकी उपलब्धियां देश की लैंगिक समानता और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।
अंत में, राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक प्रगति और न्याय व समानता के प्रति अटूट संकल्प की पुनः पुष्टि था। जैसे-जैसे राष्ट्र आगे बढ़ रहा है, ये मूल्य इसे एक उज्ज्वल और अधिक समावेशी भविष्य की ओर मार्गदर्शित करते रहेंगे।