Last Updated Sep - 11 - 2025, 05:29 PM | Source : Fela News
SSC ने चेतावनी दी है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBE) में प्रश्नपत्र साझा करने या उस पर चर्चा करने पर नए कानून के तहत कानूनी दंड भुगतने पड़ सकते हैं।
हर बार जब कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (CBE) होती है तो माहौल में तनाव रहता है, और इस बार कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने सख्त रुख अपनाया है। लगातार हो रहे पेपर लीक, सोशल मीडिया पर लाइव या पुराने प्रश्नपत्रों पर चर्चाएं और अनुचित गतिविधियों को देखते हुए SSC ने उम्मीदवारों को कड़ी चेतावनी जारी की है।
पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत प्रश्नपत्रों पर चर्चा करना, उनका विश्लेषण करना या उन्हें सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर साझा करना—even छोटे अंश—भी गंभीर कानूनी मुश्किल में डाल सकता है। इसके तहत जुर्माना, उम्मीदवारिता रद्द होना या दोनों हो सकते हैं। ये अपराध ग़ैर-जमानती और ग़ैर-समझौताकारी माने जाएंगे। यानी दांव बहुत बड़े हैं।
SSC ने परीक्षार्थियों और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स दोनों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। यहां तक कि सामान्य-सी लगने वाली बातें, जैसे “किस सवाल का क्या जवाब दिया” या “याद से कोई प्रश्न शेयर करना”, भी इस कानून के तहत जोखिमभरी हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षाओं की विश्वसनीयता केवल सख्त नियमों से नहीं, बल्कि प्रतिभागियों की ईमानदारी से भी बनी रहती है।
कई छात्रों का मानना है कि यह सख्ती लंबे समय से ज़रूरी थी। वर्षों से प्लेटफ़ॉर्म-आधारित चर्चाएं, कोचिंग वीडियो और अनऑफिशियल लीक ने तैयारी और नकल के बीच की रेखा धुंधली कर दी थी। अब कड़ी निगरानी, बायोमेट्रिक सिस्टम और साफ़ दिशानिर्देशों के साथ SSC भरोसा बहाल करना चाहता है। हालांकि, कुछ शिक्षकों का कहना है कि संतुलन ज़रूरी है—पिछले पेपर्स पर चर्चा, मॉक टेस्ट और कॉन्सेप्ट्स की स्पष्टता अभी भी ज़रूरी है और उन्हें कानूनी व सुरक्षित तरीकों से जारी रहना चाहिए।
आख़िरकार, यह चेतावनी एक टर्निंग पॉइंट है। यह हर प्रतिभागी—छात्र, शिक्षक, कंटेंट क्रिएटर—से जिम्मेदारी निभाने की अपील है, ताकि उस भरोसे को बचाया जा सके जिस पर परीक्षाओं की नींव टिकी होती है।
Feb - 24 - 2026
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