Last Updated Aug - 19 - 2025, 11:04 AM | Source : Fela News
भारतीय सरकार सांस्कृतिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण में निवेश कर रही है ताकि धरोहर की रक्षा हो सके और सांस्कृतिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकें।
भारत सरकार ने सांस्कृतिक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक कलाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। इस दिशा में सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) अहम भूमिका निभा रहा है। यह संस्था ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाती है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप हैं और पाठ्यक्रम में भारतीय कला और धरोहर को शामिल करते हैं।
इसके अलावा, CCRT मास्टर कारीगरों और कलाकारों के साथ कार्यशालाएँ और पाठ्यक्रम भी आयोजित करता है, जिससे सांस्कृतिक उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और आर्कियोलॉजिकल इंस्टिट्यूट क्रमशः थिएटर और पुरातत्व में विशेष प्रशिक्षण देते हैं, जिससे युवाओं को इन क्षेत्रों में करियर बनाने का मौका मिलता है। वहीं, नेशनल रिसर्च फॉर कल्चरल प्रॉपर्टी कंजर्वेशन प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण देता है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा में मदद करता है।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय अभिलेखागार के अंतर्गत चलने वाला आर्काइवल स्टडी स्कूल भविष्य के अभिलेख विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करता है, जिन्हें बाद में सरकारी और निजी संस्थानों में रोजगार मिलता है। इंडियन हेरिटेज इंस्टिट्यूट, जो एक मानद विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित है, कला और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े शिक्षा और शोध के अवसर उपलब्ध कराता है।
ये सभी पहलें मिलकर सरकार की उस दृष्टि को आगे बढ़ाती हैं, जिसमें सांस्कृतिक उद्योगों के विकास के जरिए सतत, समावेशी और संतुलित आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना शामिल है।