Fela News Lifestyle Header Banner

TISS में दलित स्कॉलर का निलंबन: विरोध प्रदर्शन के बीच प्रशासन पर उठे सवाल

TISS में दलित स्कॉलर का निलंबन: विरोध प्रदर्शन के बीच प्रशासन पर उठे सवाल

Last Updated Mar - 28 - 2025, 12:02 PM | Source : Fela News

TISS में दलित स्कॉलर के निलंबन पर विरोध तेज हो गया है। छात्रों और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, इसे अन्यायपूर्ण करार देते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय
TISS में दलित स्कॉलर का निलंबन: विरोध प्रदर्शन के बीच प्रशासन पर उठे सवाल
TISS में दलित स्कॉलर का निलंबन: विरोध प्रदर्शन के बीच प्रशासन पर उठे सवाल

मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) इन दिनों विवादों में है। दलित पीएचडी स्कॉलर रामदास के.एस. के निलंबन के बाद छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि रामदास ने संस्थान के नियम तोड़े, जबकि विरोध करने वालों का मानना है कि यह उनकी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है।

क्या है मामला?
रामदास के.एस. को 18 अप्रैल 2024 को TISS से निलंबित कर दिया गया। उन पर "गैरकानूनी गतिविधियों" और "संस्थान के नियमों के उल्लंघन" के आरोप लगे।

मुख्य आरोप:

जनवरी 2024 में संसद तक मार्च में भाग लेना

प्रतिबंधित BBC डॉक्यूमेंट्री दिखाना

नेशनल अवॉर्ड विनिंग डॉक्यूमेंट्री राम के नाम का प्रदर्शन

बिना अनुमति कैंपस में ज्यादा देर तक रुकना

TISS प्रशासन के अनुसार, ये गतिविधियाँ संस्थान के अनुशासन नियमों के खिलाफ थीं।

छात्रों और कार्यकर्ताओं का विरोध क्यों?
छात्र और सामाजिक संगठन इसे अन्याय मान रहे हैं। उनका कहना है कि रामदास को उनकी सामाजिक-राजनीतिक सोच के कारण निशाना बनाया गया।

उनके तर्क:

विरोध प्रदर्शन और डॉक्यूमेंट्री दिखाना अपराध नहीं है।

यह अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है।

दलित स्कॉलर को जानबूझकर निशाना बनाया गया है।

TISS के बाहर हुए प्रदर्शन में कई छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए और निलंबन वापस लेने की मांग की।

TISS प्रशासन का पक्ष
संस्थान का कहना है कि यह फैसला नियमों के तहत लिया गया है और किसी भी छात्र को नियमों का पालन करना चाहिए। उनका तर्क है कि:

रामदास ने अनुशासन का उल्लंघन किया।

यह अकादमिक नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक मामला है।

जाति या विचारधारा के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया है।

अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम अनुशासन
यह विवाद सिर्फ TISS तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़ी बहस छेड़ रहा है—क्या विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लग रही है? कुछ लोग मानते हैं कि अनुशासन ज़रूरी है, लेकिन छात्रों को अपनी बात कहने का हक़ भी मिलना चाहिए।

अब आगे क्या?
विरोध प्रदर्शन के बीच यह देखना होगा कि TISS प्रशासन अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है या नहीं। क्या रामदास को न्याय मिलेगा, या प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहेगा?

यह मामला सिर्फ TISS का नहीं है, बल्कि यह छात्रों के अधिकारों, अभिव्यक्ति की आज़ादी और संस्थागत अनुशासन के बीच संघर्ष का प्रतीक बन गया है। आने वाले दिनों में इसका क्या नतीजा निकलता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

Share :

Trending this week

सरकार देगी ₹12 हजार सालाना

May - 30 - 2026

देश में आज भी लाखों ऐसे छात्र हैं जो पढ़ाई में प्रतिभाशा... Read More

UP TGT 2026 सिटी स्लिप जारी

May - 23 - 2026

उत्तर प्रदेश में टीजीटी भर्ती परीक्षा 2026 का इंतजार कर रह... Read More

4 बार UPSC क्रैक कर बनीं प्रेरणा श्रेया त्यागी!

May - 23 - 2026

भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली UPSC सिविल स... Read More