Last Updated May - 24 - 2025, 10:51 AM | Source : Fela News
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि अब सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनने के लिए न्यूनतम तीन वर्षों की वकालत आवश्यक होगी, जिससे नए लॉ ग्रेजुएट्स को सीधे न्यायिक सेवा
21 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई, न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन शामिल थे, ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि "कानून की किताबों से प्राप्त ज्ञान या पूर्व-सेवा प्रशिक्षण, अदालत की कार्यवाही के प्रत्यक्ष अनुभव की जगह नहीं ले सकते।"
यह निर्णय 2002 के उस फैसले को पलटता है, जिसमें लॉ ग्रेजुएट्स को सीधे न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। अब उम्मीदवारों को तीन साल की वकालत का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा, जो किसी वरिष्ठ अधिवक्ता या न्यायिक अधिकारी द्वारा प्रमाणित हो।
इस फैसले से महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर जैसे संस्थानों पर प्रभाव पड़ेगा, जिन्होंने सीधे न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल भविष्य की भर्तियों पर लागू होगा; वर्तमान में चल रही भर्तियों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कुल मिलाकर, यह निर्णय न्यायिक प्रणाली में व्यावहारिक अनुभव को महत्व देता है और न्यायिक सेवा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।