Last Updated May - 06 - 2026, 12:06 PM | Source : Fela News
आजादी के बाद देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरदार बलदेव सिंह ने संभाली और वे भारत के पहले रक्षा मंत्री बने। जानिए उस समय उन्हें कितना वेतन मिलता था और क्या सुविधाएं थीं।
आज जब हम देश की सुरक्षा, सेना की ताकत और रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारियों की बात करते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि आजादी के बाद इस अहम मंत्रालय की कमान सबसे पहले किसके हाथों में थी। यह जिम्मेदारी मिली थी सरदार बलदेव सिंह को, जो भारत के पहले रक्षा मंत्री बने।
पंजाब से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
सरदार बलदेव सिंह का जन्म 11 जुलाई 1902 को पंजाब के रोपड़ जिले के डुमना गांव में हुआ था। उनका परिवार एक प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार था। उनके पिता सर इंद्र सिंह एक बड़े उद्योगपति थे। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा के बाद Khalsa College Amritsar से पढ़ाई पूरी की और बाद में अपने परिवार के स्टील उद्योग से जुड़ गए।
धीरे-धीरे वे व्यवसाय में सफल होते गए और कंपनी के डायरेक्टर बने, लेकिन उनका झुकाव हमेशा समाज और देश सेवा की ओर रहा।
राजनीति में प्रवेश और स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
1937 में उन्होंने पंजाब प्रांतीय विधानसभा का चुनाव जीता और राजनीति में सक्रिय रूप से प्रवेश किया। वे पंथिक पार्टी से जुड़े और बाद में शिरोमणि अकाली दल के साथ भी सक्रिय रहे। मास्टर तारा सिंह जैसे नेताओं के साथ उनकी राजनीतिक साझेदारी महत्वपूर्ण रही।
आजादी के दौर में उन्होंने सिख समुदाय और पंजाब के प्रतिनिधि के रूप में कई अहम बैठकों में भाग लिया, जहां देश के विभाजन और भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
देश के पहले रक्षा मंत्री बने
1947 में भारत की आजादी के बाद जब नई सरकार बनी, तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सरदार बलदेव सिंह को देश का पहला रक्षा मंत्री नियुक्त किया। यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि देश नई शुरुआत कर रहा था और उसी दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच पहला कश्मीर युद्ध भी शुरू हो गया था।
इस कठिन परिस्थिति में उन्होंने रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी को मजबूती से संभाला और सेना के संगठन और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम किया।
‘सरदार’ उपाधि और नेतृत्व की पहचान
उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सम्मानपूर्वक ‘सरदार’ कहा जाता था। पंजाबी परंपरा में यह शब्द नेतृत्व और सम्मान का प्रतीक माना जाता है, जो उनके नाम के साथ स्थायी रूप से जुड़ गया।
उस दौर की सैलरी कितनी थी?
आज के समय में मंत्रियों की सैलरी लाखों में होती है, लेकिन आजादी के बाद स्थिति बिल्कुल अलग थी। देश आर्थिक रूप से कमजोर था, इसलिए नेताओं ने खुद भी कम वेतन रखने का फैसला किया था। सरदार बलदेव सिंह को रक्षा मंत्री के रूप में लगभग 45 रुपये प्रतिदिन भत्ता मिलता था, जो दो हिस्सों में तय था और इनकम टैक्स से मुक्त था।
इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान
सरदार बलदेव सिंह का योगदान केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं था, बल्कि वे भारत की शुरुआती रक्षा व्यवस्था को आकार देने वाले नेताओं में शामिल थे। उनका जीवन आज भी देश के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
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