Last Updated Feb - 05 - 2026, 03:18 PM | Source : Fela News
हालिया मेडिकल स्टडी में पुरुषों में हृदय रोग के शुरुआती जोखिम का खुलासा हुआ है।रिपोर्ट में जैविक, जीवनशैली और हार्मोनल कारणों को प्रमुख कारक बताया गया है।
हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल स्टडी में यह सामने आया है कि पुरुषों में हार्ट डिजीज का खतरा महिलाओं की तुलना में औसतन लगभग दस वर्ष पहले विकसित हो जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह अंतर केवल जीवनशैली तक सीमित नहीं है, बल्कि जैविक संरचना और हार्मोनल कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययन में विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसके आधार पर यह निष्कर्ष सामने आया।
सूत्रों के अनुसार पुरुषों में धूम्रपान, अत्यधिक तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता जैसे जोखिम कारक अपेक्षाकृत अधिक पाए गए। वहीं दूसरी ओर महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन को हृदय सुरक्षा से जुड़ा माना जाता है, जो रजोनिवृत्ति तक हार्ट डिजीज के जोखिम को कुछ हद तक कम रखता है। अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि महिलाओं में हृदय रोग के मामले अपेक्षाकृत देर से सामने आते हैं।
बताया जा रहा है कि स्टडी में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल स्तर, बॉडी मास इंडेक्स और पारिवारिक इतिहास जैसे संकेतकों को भी शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुषों में 40 वर्ष के आसपास जोखिम तेजी से बढ़ने लगता है, जबकि महिलाओं में यह प्रवृत्ति सामान्यतः 50 वर्ष के बाद अधिक स्पष्ट होती है। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में जेंडर-आधारित जोखिम आकलन को शामिल करना जरूरी होता जा रहा है।
इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रारंभिक जांच, नियमित फिटनेस और संतुलित आहार पर जोर दिया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या पुरुषों में हृदय रोग की स्क्रीनिंग आयु सीमा को और कम किया जाना चाहिए, ताकि शुरुआती चरण में ही जोखिम की पहचान हो सके।
डॉक्टरों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और जीवनशैली सुधार से दोनों ही वर्गों में हार्ट डिजीज के बढ़ते मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि अध्ययन के निष्कर्षों को व्यापक जनसंख्या पर लागू करने से पहले और दीर्घकालिक शोध की आवश्यकता भी बताई जा रही है।
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