Last Updated Oct - 03 - 2025, 04:42 PM | Source : Fela News
कफ सिरप से होने वाली बढ़ती मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। गलत दवा, बिना prescription के इस्तेमाल और निगरानी की कमी जिम्मेदार मानी जा रही है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत का मामला और गंभीर हो गया है। शुरुआत में 6 मासूमों की जान जाने की खबर आई थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 9 तक पहुंच गई है। सिर्फ इतना ही नहीं, राजस्थान से भी दो बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं ने दवा की गुणवत्ता और निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन बच्चों की तबीयत बिगड़ी, उन्होंने एक ही ब्रांड की कफ सिरप का इस्तेमाल किया था। सेवन के कुछ समय बाद ही उल्टी, बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखने लगे। परिजन जब तक अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक कई बच्चों की हालत गंभीर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने भी माना कि यह असर दवा से जुड़ा हुआ लग रहा है।
प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित सिरप के सैंपल जब्त कर जांच के लिए भेज दिए हैं। वहीं, दवा बनाने वाली कंपनी पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में मेडिकल स्टोर से उस सिरप की बिक्री रोकने के आदेश दिए हैं।
इस घटना ने लोगों के बीच दहशत फैला दी है। माता-पिता अब बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले दो बार सोच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शुरुआती स्तर पर दवाओं की टेस्टिंग और क्वालिटी कंट्रोल सख्ती से हो, तो ऐसी घटनाओं को टाला जा सकता है।
छिंदवाड़ा और राजस्थान की यह त्रासदी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी है। सवाल यही है कि मासूमों की इन मौतों का जिम्मेदार कौन है और कब तक दवा के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ होता रहेगा।
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