Last Updated Jan - 06 - 2026, 05:07 PM | Source : Fela News
अकाल तख्त के समन ने पंजाब में आम आदमी पार्टी के सामने बड़ी धार्मिक-राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे सिख वोट बैंक और विपक्षी राजनीति दोनों प्रभावित हो सकते ह
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर धर्म और सत्ता के टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। राज्य के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann को श्री Akal Takht Sahib की ओर से समन जारी किया गया है, जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए गंभीर राजनीतिक और धार्मिक चुनौती खड़ी कर दी है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने मुख्यमंत्री को 15 जनवरी 2026 को तख्त के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
यह समन मुख्यमंत्री भगवंत मान के कुछ कथित बयानों और वीडियो से जुड़ा है, जिनमें सिख धार्मिक परंपराओं—जैसे गुरु की गोलक और दसवंध - को लेकर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई गई है। इसके अलावा, एक वीडियो में संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार को भी इस समन का आधार बताया गया है। अकाल तख्त सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है और उसके निर्देशों को सिख समाज में अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है।
राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए बेहद संवेदनशील समय पर सामने आया है। AAP ने 2022 के विधानसभा चुनावों में सिख मतदाताओं के बड़े समर्थन के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। भगवंत मान खुद सिख समुदाय से आते हैं और पार्टी ने खुद को पारंपरिक दलों के विकल्प के रूप में पेश किया था। ऐसे में अकाल तख्त का समन AAP की धार्मिक संवेदनशीलता और सिख समुदाय के साथ उसके रिश्तों पर सवाल खड़े कर रहा है।
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को तुरंत लपक लिया है । Shiromani Akali Dal (SAD) और Indian National Congress ने AAP पर सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। अकाली दल का कहना है कि आम आदमी पार्टी सत्ता में आने के बाद सिख परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान नहीं कर रही। वहीं कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भगवंत मान के बयानों से पंजाब की सामाजिक-धार्मिक एकता को नुकसान पहुंचा है।
AAP की ओर से फिलहाल संयमित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अकाल तख्त के प्रति सम्मान रखते हैं और जो भी भ्रम या गलतफहमी है, उसे संवाद के जरिए दूर किया जाएगा। हालांकि यह भी साफ है कि 15 जनवरी को भगवंत मान की पेशी न सिर्फ धार्मिक, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समन AAP के लिए “अग्निपरीक्षा" जैसा है। अगर पार्टी और मुख्यमंत्री इस मुद्दे को संभालने में चूकते हैं, तो इसका असर सिख वोट बैंक और आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। वहीं, यदि AAP संतुलित और सम्मानजनक रुख अपनाती है, तो वह इस संकट को अवसर में भी बदल सकती है।
कुल मिलाकर, अकाल तख्त का यह समन पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बनने वाला है। अब सबकी नजर 15 जनवरी पर टिकी है, जब भगवंत मान का कदम न सिर्फ उनकी सरकार, बल्कि आम आदमी पार्टी के भविष्य की दिशा भी तय कर सकता है।