Last Updated Nov - 19 - 2025, 11:55 AM | Source : Fela News
ED के अनुसार, यूनिवर्सिटी के CFO ने बताया कि सभी बड़े आर्थिक फैसले खुद चेयरमैन जवाद सिद्दीकी ही लेते थे। कॉलेजों की फंडिंग पर पूरा कंट्रोल भी उन्हीं के पास था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े बड़े घोटाले में ED ने चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट से 13 दिन की कस्टडी ले ली है। उन पर आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों को फर्जी मान्यता दिखाकर ठगा और करोड़ों रुपये कमाए। ED ने जवाद को 18 नवंबर की रात करीब 11 बजे उनके घर से पकड़ा। गिरफ्तारी PMLA की धारा 19 के तहत हुई।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 13 नवंबर को दो FIR दर्ज की थीं, जिनमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी ने फर्जी NAAC मान्यता और UGC की 12B मान्यता का झूठा दावा किया, जबकि UGC ने साफ कर दिया था कि यूनिवर्सिटी के पास ऐसी कोई मान्यता नहीं थी।
‘415 करोड़ रुपये धोखे से कमाए गए’
ED का कहना है कि गलत दावों के सहारे छात्रों से एडमिशन और फीस ली गई। इसी आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। एजेंसी के मुताबिक, 415 करोड़ रुपये उन सालों में कमाए गए जब यूनिवर्सिटी के पास कोई भी मान्यता नहीं थी। इसलिए इस रकम को अपराध से कमाया गया पैसा माना गया है।
जवाद सिद्दीकी की भूमिका कैसे सामने आई?
जांच में पता चला कि कई बार यूनिवर्सिटी का पैसा उनके परिवार की कंपनियों और कॉन्ट्रैक्टरों के खातों में भेजा गया। यूनिवर्सिटी के CFO ने भी बयान दिया कि सभी बड़े वित्तीय फैसले जवाद सिद्दीकी ही लेते थे और फाइनेंस से जुड़े सभी काम उन्हीं के कंट्रोल में थे। ED ने इसे उनकी सीधी भूमिका का बड़ा सबूत बताया।
ED के वकील ने कोर्ट में कहा कि अभी मनी ट्रेल निकालने में काफी काम बाकी है। कई दस्तावेज़ और डिजिटल डेटा इकट्ठा करना है। उन्होंने ये भी कहा कि आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है और उसके परिवार के लोग विदेश में रहते हैं, इसलिए भागने का खतरा है।
जवाद सिद्दीकी के वकील की दलील
जवाद सिद्दीकी के वकील का कहना था कि FIR ही गलत है, इसलिए ED को 14 दिन नहीं, केवल 7 दिन की कस्टडी दी जाए। लेकिन कोर्ट ने ये बात नहीं मानी। कोर्ट ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है, जांच अभी शुरुआती चरण में है और ED को कई लोगों से पूछताछ करनी है। इसी वजह से कोर्ट ने जवाद सिद्दीकी को 13 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया।
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