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जवाद अहमद सिद्दीकी: कौन हैं और ED की नज़र में क्यों आए?

जवाद अहमद सिद्दीकी: कौन हैं और ED की नज़र में क्यों आए?

Last Updated Nov - 19 - 2025, 11:50 AM | Source : Fela News

Al-Falah University Javed Ahmed Siddiqui: अल फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। ईडी ने अल-फलाह
जवाद अहमद सिद्दीकी
जवाद अहमद सिद्दीकी

ईडी ने आतंकियों की फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में कार्रवाई करते हुए अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक, अल फलाह के अकाउंटेंट को भी हिरासत में लिया गया है। दिल्ली ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी का लिंक सामने आने के बाद से जवाद सिद्दीकी जांच के रडार पर थे।

कौन है जवाद अहमद सिद्दीकी?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, अल फलाह यूनिवर्सिटी चलाने वाले ट्रस्ट में जवाद सिद्दीकी ने अपनी पत्नी, बेटी और भाइयों को ट्रस्टी बनाया है। इंटरनेट से यूनिवर्सिटी की जानकारी हटाए जाने के बाद जांच एजेंसियों का शक और बढ़ गया।

जवाद सिद्दीकी का जन्म 15 नवंबर 1964 को एमपी के महू में हुआ। उन्होंने इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से बीटेक किया और 199294 तक जामिया मिलिया में लेक्चरर रहे।

ईडी की छापेमारी

18 नवंबर 2025 को ईडी ने अल फलाह ग्रुप के 19 ठिकानों पर छापेमारी की। वहां से कई दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और करीब 48 लाख रुपये कैश मिला। जांच में पता चला कि ट्रस्ट के पैसे को गलत तरीके से परिवार की कंपनियों में भेजा गया। जवाद सिद्दीकी पर पहले भी फाइनेंशियल फ्रॉड के आरोप लग चुके हैं।

अल फलाह यूनिवर्सिटी के कामकाज में कई वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। ईडी यह पता लगा रही है कि इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी खड़ी करने के लिए पैसे कहां से आए, क्योंकि उन पर धोखाधड़ी के केस भी चल चुके हैं। दिल्ली बम ब्लास्ट केस में उन्हें नोटिस भेजा गया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए।

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

ED के अनुसार, अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट 1995 में बना था और शुरुआत से ही इसका पूरा कंट्रोल जवाद सिद्दीकी के पास है। ट्रस्ट के नाम पर चलने वाले सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी वही संभालते हैं। जांच में पता चला कि ट्रस्ट की कमाई में अचानक तेज बढ़ोतरी दिखी, लेकिन असल इनकम उससे मेल नहीं खाती। कंस्ट्रक्शन, कैटरिंग और कई सेवाओं के कॉन्ट्रैक्ट सीधे उनकी पत्नी और बच्चों की कंपनियों को दिए गए थे। कई शेल कंपनियों के जरिए पैसे की हेराफेरी भी की गई।

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