Last Updated May - 27 - 2026, 05:14 PM | Source : Fela News
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR को लेकर चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए किया गया यह कदम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ नहीं है.
बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को राहत दे दी है. कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग के पास SIR कराने का पूरा अधिकार है और इस प्रक्रिया में किसी भी संवैधानिक या कानूनी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है. इस फैसले के बाद अब देशभर में SIR लागू करने का रास्ता भी लगभग साफ माना जा रहा है.
NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स समेत कई संगठनों और लोगों ने बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. मामले की सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि वोटर लिस्ट की शुद्धता बनाए रखना और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है.
कोर्ट ने कहा कि बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बड़े पैमाने पर पलायन और वोटर लिस्ट में लगातार बदलावों को देखते हुए आयोग ने यह कदम उठाया. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम, गलत एंट्री और अशुद्धियों को हटाने के लिए SIR जैसी प्रक्रिया जरूरी थी.
तीन बड़े सवालों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन अहम सवालों पर विस्तार से चर्चा की. पहला, क्या चुनाव आयोग के पास SIR कराने का अधिकार है? दूसरा, क्या यह प्रक्रिया वैध उद्देश्य के लिए की गई? और तीसरा, क्या इसमें जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन हुआ?
कोर्ट ने तीनों मामलों में चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR का मकसद लोकतंत्र की बुनियाद यानी निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव को मजबूत करना है.
‘वोटर लिस्ट की शुद्धता बेहद जरूरी’
सुप्रीम Court ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सिर्फ वोट डालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सही और विश्वसनीय वोटर लिस्ट भी उतनी ही जरूरी है. कोर्ट ने माना कि लंबे समय से वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव, नाम जुड़ने और हटने की वजह से गहन पुनरीक्षण जरूरी हो गया था.
नागरिकता पर भी कोर्ट ने दिया बड़ा बयान
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग सीमित स्तर पर नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फैसला देने का अधिकार उसके पास नहीं है. कोर्ट ने कहा कि संदिग्ध मामलों में अंतिम जांच केंद्र सरकार करेगी.
इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों के नाम 4 हफ्तों के भीतर गृह मंत्रालय को भेजे जाएं.
देशभर में लागू हो सकता है SIR
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. माना जा रहा है कि अब बिहार के बाद दूसरे राज्यों में भी वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा शुरू हो सकती है. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि SIR प्रक्रिया किसी को नागरिकता से वंचित करने का अंतिम फैसला नहीं मानी जाएगी.
यह भी पढ़े