Last Updated May - 27 - 2026, 04:35 PM | Source : Fela News
राशन चोरी पर डिजिटल स्ट्राइक! दिल्ली सरकार और RBI का बड़ा प्लान, अब कार्डधारकों को मिलेगा CBDC वॉलेट. सिर्फ PDS दुकानों पर इस्तेमाल होगी डिजिटल करेंसी, कालाबाजारी पर लगेगी रोक.
दिल्ली में सरकारी राशन की चोरी, जमाखोरी और कालाबाजारी पर अब बड़ा डिजिटल वार होने जा रहा है. दिल्ली सरकार और RBI ने मिलकर ऐसा प्लान तैयार किया है, जिससे राशन माफियाओं पर सीधी लगाम लगाने की तैयारी है. सरकार अब ‘सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी’ यानी CBDC के जरिए राशन वितरण सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाने जा रही है.
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से सिर्फ असली लाभार्थियों तक ही सरकारी राशन पहुंचेगा और बीच में होने वाली चोरी या गड़बड़ी पर रोक लगेगी. दिल्ली सरकार के मुताबिक, राशन कार्ड धारकों को उनकी पात्रता के हिसाब से डिजिटल करेंसी सीधे उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से जुड़े CBDC वॉलेट में भेजी जाएगी.
क्या है CBDC डिजिटल करेंसी?
CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करेगा. इसकी वैल्यू सामान्य नकदी जितनी ही होगी, लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ सरकारी राशन खरीदने के लिए किया जा सकेगा. यानी यह डिजिटल पैसा केवल PDS दुकानों पर ही काम करेगा.
कैसे मिलेगा राशन?
नई व्यवस्था के तहत लाभार्थी किसी भी अधिकृत PDS दुकान पर जाकर राशन ले सकेंगे. वहां POS मशीन पर QR कोड स्कैन या OTP वेरिफिकेशन के जरिए पेमेंट होगा. राशन लेते ही रकम सीधे लाभार्थी के CBDC वॉलेट से कट जाएगी.
DBT से कितना अलग है नया सिस्टम?
अब तक सरकार DBT के जरिए सब्सिडी सीधे बैंक खातों में भेजती थी, जिसका इस्तेमाल लोग कहीं भी कर सकते थे. लेकिन CBDC सिस्टम में डिजिटल करेंसी सिर्फ राशन खरीदने के लिए लॉक रहेगी. यानी इस रकम का इस्तेमाल किसी दूसरे खर्च में नहीं किया जा सकेगा.
64.93 लाख लोगों को मिलेगा फायदा
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में फिलहाल 15.46 लाख राशन कार्ड जारी किए गए हैं, जिनसे करीब 64.93 लाख लोग जुड़े हैं. इनके लिए 1943 राशन वितरण केंद्र संचालित हो रहे हैं. सरकार की योजना आने वाले समय में सभी PDS दुकानों पर CBDC सिस्टम लागू करने की है.
शुरुआत में इस डिजिटल सिस्टम के जरिए गेहूं और चावल बांटे जाएंगे. बाद में चीनी समेत दूसरी जरूरी चीजों को भी इसी व्यवस्था के तहत देने की तैयारी है. सरकार का मानना है कि इससे राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और कालाबाजारी पर बड़ी चोट पड़ेगी.
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