Last Updated Feb - 19 - 2026, 01:26 PM | Source : Fela News
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विधायकों की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी है और फोन न उठाने या लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस मुद्दे पर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी विधायकों के फोन नहीं उठाता या उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेता, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री को निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई केवल औपचारिक न हो, बल्कि यह एक उदाहरण बने, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने की हिम्मत न करे।
यह मुद्दा विधानसभा में उस समय प्रमुखता से उठा, जब कई विधायकों ने शिकायत की कि संबंधित विभागों के अधिकारी उनके फोन कॉल का जवाब नहीं देते और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। विधायकों का कहना था कि वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संपर्क करते हैं, लेकिन जब अधिकारी उनकी बात ही नहीं सुनते, तो इससे जनता का विश्वास भी प्रभावित होता है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस स्थिति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों की अपनी-अपनी भूमिका और जिम्मेदारी होती है।
इन संस्थाओं के बीच समन्वय और सम्मान जरूरी है। यदि कार्यपालिका विधायकों की बातों को नजरअंदाज करती है, तो इससे लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर होती है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन पूरी जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए और जनप्रतिनिधियों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए।
महाना ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन्हें समाज और आने वाली पीढ़ियों के हित में काम करना होता है। उन्होंने विधायकों को भी नसीहत दी कि वे अपने कर्तव्यों को गंभीरता से निभाएं और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जो नेता केवल चुनाव जीतने के लिए काम करते हैं, वे
केवल राजनेता होते हैं, लेकिन जो भविष्य के लिए काम करते हैं, वही सच्चे अर्थों में स्टेट्समैन कहलाते हैं।
इस मुद्दे को पहले नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने सदन में उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कई अधिकारी विधायकों के साथ उचित व्यवहार नहीं करते और उनके फोन कॉल का जवाब देने से भी बचते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए।
अध्यक्ष के इस सख्त रुख के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अब अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर संवाद बनाए रखना होगा और उनकी शिकायतों को प्राथमिकता देनी होगी। यह कदम न केवल प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करेगा, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को भी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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