Last Updated Jun - 09 - 2025, 10:50 AM | Source : Fela News
बॉम्बे हाई कोर्ट के एक जज ने बताया कि भारी कार्यभार के चलते दिसंबर 2024 में सुनाया गया आदेश मई 2025 में ही ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सका।
बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस माधव जमदार ने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने 19 दिसंबर 2024 को खुले कोर्ट में एक 85 पन्नों का फ़ैसला सुनाया था, लेकिन व्यस्तता और देर तक कार्य करने के कारण वह इसका इलेक्ट्रॉनिक अपलोड सिर्फ 30 मई 2025 को ही कर पाए । उन्होंने कहा कि वह रोज़ाना तड़के काम शुरू करते हैं और रात को आमतौर पर 11:30 PM तक चेंबर में रहते हैं, कई बार छुट्टियों पर भी दस्तावेज़ी काम पूरा करने में व्यस्त रहते हैं। उनके अनुसार, उनका दिन 2 AM तक चलता है और इसी कारण निर्णय अपलोड में देरी हुई ।
यह खुलासा उस समय हुआ जब किसी पक्ष ने मामला डिक्लॉज़र पर सवाल उठाया। न्यायाधीश ने ख़ुद लिखित रूप में अपनी मेहनत और डेडलाइन पर दबाव की जानकारी दी, ताकि देरी की वजह स्पष्ट हो सके ।
मुख्य बातें:
आदेश 19 दिसंबर 2024 को सुनाया गया, लेकिन 30 मई 2025 को ही वेबसाइट पर अपलोड हुआ।
जस्टिस जमदार ने बताया कि काम का बोझ, देर रात तक न्यायिक कार्य, और छुट्टियों पर भी काम करना मुख्य कारण रहा।
कोर्ट ने यह उदाहरण न्याय व्यवस्था में मानव मेहनत और समय सीमा की चुनौतियों को बेबाकी से पेश किया।
यह मामला न्यायपालिका में कार्यभार और विवरणी अपलोड की समयबद्धता की चुनौतियों पर स्पष्ट प्रकाश डालता है। फेला न्यूज़ इस घटना पर आगे अपडेट देती रहेगी।