Last Updated Apr - 28 - 2026, 11:43 AM | Source : Fela News
ओडिशा के क्योंझर में इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई। बैंक से 20 हजार रुपये न मिलने पर जीतू मुंडा अपनी मृत बहन का कंकाल कब्र से निकालकर सीधे शाखा में ले आया, जिसे देखकर बैंककर्मियों से लेकर पुलिस तक के हाथ-पांव फूल गए।
ओडिशा के क्योंझर जिले से ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने बैंकिंग सिस्टम की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां एक शख्स अपनी मृत बहन का कंकाल कब्र से निकालकर सीधे बैंक पहुंच गया। बैंक परिसर के बाहर जैसे ही उसने बहन के अवशेष रखे, वहां मौजूद कर्मचारी, ग्राहक और स्थानीय लोग दहशत में आ गए। मामला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बार-बार बैंक गया, लेकिन नहीं मिली रकम
यह हैरान कर देने वाली घटना पटना थाना क्षेत्र के मल्लिपाशी गांव की है। दियानाली गांव निवासी जीतू मुंडा अपनी दिवंगत बहन कलारा मुंडा के खाते से पैसे निकालना चाहता था। बताया जा रहा है कि उसकी बहन की करीब दो महीने पहले मौत हो चुकी थी और खाते में करीब 20 हजार रुपये जमा थे। जीतू कई बार ग्रामीण बैंक पहुंचा और अधिकारियों को बहन की मौत की जानकारी देकर रकम देने की गुहार लगाई, लेकिन बैंक कर्मचारियों ने कथित तौर पर खाताधारक की मौजूदगी का हवाला देकर भुगतान से इनकार कर दिया।
फिर उठाया ऐसा कदम कि मच गया हड़कंप
लगातार चक्कर लगाने और हर बार खाली हाथ लौटने से परेशान जीतू मुंडा ने विरोध का ऐसा तरीका चुना जिसने सबको सन्न कर दिया। वह अपनी बहन के दफनाए गए शव को कब्र से खोदकर निकाला और कंकाल के अवशेषों को लेकर बैंक पहुंच गया। उसने बैंक के सामने बहन का कंकाल रख दिया और कहा कि जब खाताधारक की मौजूदगी जरूरी है तो वह उसे ले आया है। यह दृश्य देखकर बैंक कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए।
मौके पर पहुंची पुलिस, लोगों में गुस्सा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात संभाले। बाद में पुलिस ने कंकाल को वापस गांव ले जाकर दोबारा दफन कराया। हालांकि इस पूरे मामले में बैंक अधिकारियों की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। पुलिस भी जांच की बात कहकर चुप है।
संवेदनहीन सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बैंक समय पर मानवीय आधार पर मदद करता तो एक भाई को अपनी बहन के अवशेषों के साथ ऐसा अपमानजनक कदम नहीं उठाना पड़ता। अब यह मामला सिर्फ एक बैंक विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरुखी का प्रतीक बन गया है।
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