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रिश्वतखोरी पर CBI का वार, पुणे में MES अधिकारी पकड़े

रिश्वतखोरी पर CBI का वार, पुणे में MES अधिकारी पकड़े

Last Updated Feb - 07 - 2026, 06:35 PM | Source : Fela News

पुणे में CBI ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए MES के दो अधिकारियों को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया, मामले में आगे की जांच जा
रिश्वतखोरी पर CBI का वार
रिश्वतखोरी पर CBI का वार

महाराष्ट्र के Pune में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पुणे के खड़की इलाके में स्थित Military Engineering Services (MES) के दो अधिकारियों को रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को की गई, जिसने रक्षा से जुड़े निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर (E/M-II) सुनील निकम और जूनियर इंजीनियर (E/M-II) सुरेश म्हस्के शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, यह मामला एक ठेकेदार की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जो MES के तहत किए गए एक कार्य से जुड़ा हुआ है। 

CBI को दी गई शिकायत में ठेकेदार ने आरोप लगाया कि उसने निर्धारित समय पर कार्य पूरा कर दिया था और कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी जमा कर दिया गया था। इसके बावजूद भुगतान को जानबूझकर रोका गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उसने भुगतान जारी करने की बात कही, तो संबंधित अधिकारियों ने उससे 6 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। 

शिकायत की प्राथमिक जांच के बाद CBI ने 3 फरवरी 2026 को इस संबंध में मामला दर्ज किया। जांच के दौरान यह सामने आया कि दोनों आरोपी अधिकारी आपस में मिलीभगत कर रिश्वत की रकम तय कर रहे थे। बातचीत के बाद उन्होंने पहली किस्त के तौर पर 2 लाख रुपये लेने पर सहमति जताई। 

इसके बाद CBI ने पूरी योजना के तहत 5 फरवरी को जाल बिछाया। शिकायतकर्ता को तय समय और स्थान पर रिश्वत की रकम के साथ भेजा गया। जैसे ही जूनियर इंजीनियर सुरेश म्हस्के ने 2 लाख रुपये की रिश्वत ली, CBI की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की रकम उसके कार्यालय से बरामद की गई। 

पूछताछ और सबूतों के आधार पर CBI ने इस साजिश में शामिल असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर सुनील निकम को भी गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी का कहना है कि भुगतान रोकने और रिश्वत मांगने का फैसला दोनों अधिकारियों की आपसी सहमति से लिया गया था। 

गिरफ्तारी के बाद CBI ने दोनों आरोपियों के आवास और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, साथ ही करीब 1,88,500 रुपये की नकद राशि भी बरामद की गई। आरोपियों इस रकम का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सके, जिससे एजेंसी का शक और गहरा हो गया। 

CBI अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल एक रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि MES से जुड़े अन्य कार्यों में भी भ्रष्टाचार की कड़ियां हो सकती हैं। फिलहाल एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इससे पहले भी ठेकेदारों से इसी तरह की अवैध वसूली की गई थी। 

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर सरकारी और रक्षा से जुड़े विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। CBI का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और अगर इसमें और लोग शामिल पाए गए, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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