Last Updated May - 19 - 2025, 10:59 AM | Source : Fela News
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कांग्रेस ने दलित और पिछड़े वर्गों को साधने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई है, जिसमें राहुल गांधी की सक्रियता और संगठनात्मक बदलाव
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले पांच महीनों में बिहार के चार दौरे किए हैं, जिनमें 'शिक्षा न्याय संवाद', 'पलायन रोको, नौकरी दो' यात्रा और 'संविधान लीडरशिप प्रोग्राम' जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य दलित, महादलित, अति पिछड़ा, पसमांदा और अल्पसंख्यक समुदायों को पार्टी से जोड़ना है।
राहुल गांधी ने दरभंगा में दलित छात्रों के साथ संवाद किया, जिसके बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इस पर प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि "क्या दलितों की आवाज उठाना अपराध है?" कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
संगठनात्मक स्तर पर भी कांग्रेस ने बदलाव किए हैं। दलित नेता राजेश कुमार को बिहार प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिससे पार्टी का झुकाव वंचित वर्गों की ओर स्पष्ट होता है।
कांग्रेस की यह रणनीति न केवल भाजपा और जदयू को चुनौती देती है, बल्कि महागठबंधन के भीतर भी नए समीकरण बना रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, कांग्रेस की यह पहल राजद और वाम दलों के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।
बिहार में दलित और पिछड़ा वर्ग मिलकर राज्य की आबादी का लगभग 57% हिस्सा बनाते हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि इन वर्गों को अपने पक्ष में करके राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की जाए।
राहुल गांधी की सक्रियता और कांग्रेस की नई रणनीति से यह स्पष्ट है कि पार्टी बिहार में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। आगामी चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति कितनी सफल होती है।
यह भी पढ़े :