Last Updated Jan - 28 - 2026, 05:41 PM | Source : Fela News
यूजीसी के नए नियमों को लेकर बीजेपी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने सरकार से इन पर दोबारा विचार की मांग की है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहा विवाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए अंदरूनी चुनौती बनता नजर आ रहा है। विपक्ष के विरोध के बीच अब पार्टी के अपने नेता भी इन नियमों की उपयोगिता और प्रभाव पर सवाल उठा रहे हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने यूजीसी के हालिया रेगुलेशन को अनावश्यक बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को विवादों में घसीटना किसी भी तरह से सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे नियमों की कोई ठोस जरूरत नहीं थी और इससे कॉलेज व विश्वविद्यालय अनावश्यक विवादों का केंद्र बन सकते हैं। उनके मुताबिक, पहले से ही रैगिंग और भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून मौजूद हैं, ऐसे में नए नियमों के जरिए एक नया टकराव खड़ा किया जा रहा है।
मनन कुमार मिश्रा ने आशंका जताई कि इन रेगुलेशंस के लागू होने के बाद शैक्षणिक संस्थान शिकायतों का अड्डा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र किसी भी जाति या पृष्ठभूमि के हों, वे शिक्षा के लिए आते हैं। अगर छोटी-मोटी बातों पर भी शिकायत दर्ज कराने की खुली छूट दी गई, तो इससे न केवल शिक्षकों और प्रशासन की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि छात्रों के बीच भी अविश्वास का माहौल बनेगा। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत बताया।
बीजेपी सांसद ने यह भी कहा कि सरकार और यूजीसी दोनों को इस बात पर गंभीरता से सोचना चाहिए कि क्या ये नियम वास्तव में शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाएंगे या फिर संस्थानों में अराजकता को बढ़ावा देंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि नियम लागू करने से पहले उसके दूरगामी परिणामों का आकलन बेहद जरूरी है।
इसी बीच देश के कई हिस्सों में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, संभल, कुशीनगर समेत कई जिलों में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन कर नियमों को वापस लेने की मांग की है। अलीगढ़ में तो हालात इतने बिगड़े कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने बीजेपी सांसद अनूप प्रधान के काफिले को रोक दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
दिल्ली में भी यूजीसी मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। भारी बारिश के बावजूद करीब 100 छात्रों ने नए नियमों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये नियम परिसरों में जातिगत तनाव और प्रशासनिक दबाव को बढ़ा सकते हैं।
कुल मिलाकर, यूजीसी के नए नियम अब केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं रह गए हैं। बीजेपी के भीतर से उठ रही आवाजें इस बात का संकेत हैं कि सरकार के सामने इस मसले पर संतुलित फैसला लेने की चुनौती बढ़ गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आपत्तियों को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या यूजीसी के नियमों में कोई बदलाव किया जाता है।
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