Last Updated Jan - 28 - 2026, 04:09 PM | Source : Fela News
उच्च शिक्षा से जुड़े नए यूजीसी नियमों को लेकर कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्र और शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन बदलावों से विश्वविद्यालयों की स्व
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों और शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। दिल्ली, लखनऊ, पटना, कोलकाता और हैदराबाद समेत कई शहरों में प्रदर्शन देखने को मिले हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2026 से प्रस्तावित इन नियमों को बिना व्यापक परामर्श के लागू किया जा रहा है, जिससे उच्च शिक्षा व्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि पहली बड़ी चिंता विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर है। नए नियमों के तहत कई प्रशासनिक और शैक्षणिक फैसलों में केंद्रीय भूमिका बढ़ने की बात कही जा रही है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि इससे राज्य विश्वविद्यालयों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्वतंत्र निर्णय क्षमता सीमित हो सकती है। शिक्षकों का कहना है कि अकादमिक मामलों में बाहरी दखल से शिक्षा का स्तर प्रभावित होने का खतरा है।
दूसरी अहम आपत्ति नियुक्तियों और प्रमोशन प्रक्रिया से जुड़ी है। सूत्रों के अनुसार, नए नियमों में फैकल्टी चयन और मूल्यांकन के मानकों में बदलाव का प्रस्ताव है। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि इससे पारदर्शिता कम हो सकती है और अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट आधारित नियुक्तियों को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाई जा रही है।
तीसरी चिंता पाठ्यक्रम और शोध की दिशा को लेकर जताई जा रही है। छात्रों का कहना है कि नए फ्रेमवर्क में जॉब ओरिएंटेड कोर्स पर ज्यादा जोर है, जबकि सामाजिक विज्ञान और मौलिक शोध को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है कि इससे शिक्षा का व्यापक उद्देश्य सीमित हो सकता है।
इस बीच फीस और फंडिंग से जुड़ा मुद्दा भी विरोध की बड़ी वजह बनकर सामने आया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नए नियमों के लागू होने से विश्वविद्यालयों पर आत्मनिर्भरता का दबाव बढ़ेगा, जिसका सीधा असर छात्रों पर फीस बढ़ोतरी के रूप में पड़ सकता है। प्रशासन का कहना है कि फंडिंग मॉडल को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
वहीं पांचवीं और अहम चिंता यह है कि इन नियमों को लागू करने से पहले छात्रों और शिक्षकों से पर्याप्त संवाद नहीं किया गया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यूजीसी इन नियमों पर पुनर्विचार करे और सभी हितधारकों से बातचीत के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाए। प्रशासन ने कहा है कि सुझावों पर विचार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा।
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