Last Updated Apr - 21 - 2026, 03:12 PM | Source : Fela News
हनुमानगढ़ में एटीएस की बड़ी कार्रवाई, फर्जी आधार रैकेट का खुलासा, 500 से ज्यादा सिम और अहम दस्तावेज बरामद, जांच में साइबर अपराध और संभावित आतंकी फंडिंग के चौंकाने वाले लिंक सामने आए
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एटीएस की बड़ी कार्रवाई ने एक ऐसे फर्जी आधार रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। भादरा क्षेत्र में नगरपालिका के पास चल रहे अवैध आधार सेंटर पर छापेमारी के बाद सामने आए खुलासे चौंकाने वाले हैं। यह मामला अब सिर्फ फर्जी दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तार साइबर अपराध, अंतरराज्यीय नेटवर्क और संभावित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं।
मुख्य आरोपी कुलदीप शर्मा से पूछताछ में पता चला है कि वह लंबे समय से ऑपरेटर आईडी का दुरुपयोग कर फर्जी आधार कार्ड तैयार कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि जिस सेंटर की लोकेशन गुजरात में दर्ज होनी चाहिए थी, उसे अवैध तरीके से हनुमानगढ़ में संचालित किया जा रहा था। इस मामले में जसवंत और आमिर खान नाम के व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उनकी पहचान का दुरुपयोग हुआ या वे खुद इस नेटवर्क का हिस्सा थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा देने के लिए हाईटेक तरीके अपनाए थे। मौके से लाल और सफेद रबर से बने डमी फिंगरप्रिंट बरामद हुए, जिनकी मदद से लॉग-इन किया जाता था। इतना ही नहीं, कागज पर प्रिंट की गई आंखों की तस्वीरों को आईरिस डिवाइस के सामने रखकर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को भी फर्जी तरीके से पूरा किया जाता था। एनरोलमेंट रसीदों पर फर्जी हस्ताक्षर भी खुद आरोपी ही करता था।
एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि इन फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल सिम कार्ड जारी कराने, बैंक खाते खुलवाने और बड़े स्तर पर साइबर ठगी में किया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाकर अपराधियों को विदेश भेजने की साजिश भी रची जा रही थी। साथ ही, फर्जी मोबाइल नंबरों के जरिए संदिग्ध गतिविधियों और संभावित आतंकी फंडिंग के संकेत भी मिले हैं।
छापेमारी के दौरान एटीएस को 150 से ज्यादा फर्जी रबर थंब (सिलिकॉन क्लोन), 12 लैपटॉप और 500 से अधिक सिम कार्ड बरामद हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह बटर पेपर और सिलिकॉन की मदद से फिंगरप्रिंट क्लोन तैयार करता था और रात के समय इनका इस्तेमाल कर पोर्टल में फर्जी डेटा अपलोड करता था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि आधार कार्ड में नाम और पता राजस्थान के गांवों का होता था, जबकि फोटो और बायोमेट्रिक कश्मीरी संदिग्धों से जुड़े पाए गए। इस एंगल ने जांच को और गंभीर बना दिया है, और एजेंसियों का फोकस अब आतंकी नेटवर्क और टेरर फंडिंग पर भी है।
जांच का दायरा अब जयपुर, दिल्ली, श्रीनगर और बीकानेर तक फैल चुका है। कई स्थानों पर एक साथ दबिश दी जा रही है। इसके अलावा कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिससे अंदरूनी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप को जब्त कर फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचा जा सके। एटीएस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है, और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
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