Last Updated Mar - 07 - 2026, 11:19 AM | Source : Fela news
Governor Removal Rule: बिहार में सैयद अता हसनैन को नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि किसी राज्य के गवर्नर को पद से कैसे हटाया जा सकता है।
Governor Removal Rule: बिहार में नई सरकार बनने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को राज्य का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेंगे, जिन्होंने यह पद 2 जनवरी 2025 से संभाला था। गवर्नर बदलने पर अक्सर यह सवाल उठता है कि किसी गवर्नर को पद से कैसे हटाया जा सकता है। आइए जानते हैं इसके नियम।
गवर्नर को हटाने के संवैधानिक प्रावधान
भारतीय संविधान के तहत गवर्नर को हटाना अन्य संवैधानिक पदों की तुलना में आसान है। राष्ट्रपति या सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह, गवर्नर को पद से हटाने के लिए इंपीचमेंट प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। आर्टिकल 156 के अनुसार गवर्नर राष्ट्रपति की मर्जी तक पद पर रहते हैं।
केंद्र और राष्ट्रपति की भूमिका
गवर्नर को हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है, लेकिन असल फैसला केंद्र सरकार यानी यूनियन काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स लेती है। राष्ट्रपति केंद्र सरकार की सलाह पर ही गवर्नर की नियुक्ति या हटाने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देते हैं।
हटाने का आधार
संविधान में गवर्नर को हटाने का कोई विशेष कारण तय नहीं किया गया है। यानी केंद्र सरकार बिना किसी खास कारण के भी गवर्नर को पद से हटा सकती है।
गवर्नर इस्तीफा भी दे सकते हैं
गवर्नर अपनी इच्छा से भी पद छोड़ सकते हैं। इस स्थिति में वे राष्ट्रपति को इस्तीफा देते हैं और केंद्र सरकार नए गवर्नर की नियुक्ति करती है।
इंपीचमेंट की जरूरत नहीं
गवर्नर को हटाने के लिए पार्लियामेंट में कोई मुश्किल इंपीचमेंट प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरी तरह से केंद्रीय सरकार का कार्यकारी फैसला होता है।
सुप्रीम कोर्ट का क्लियरिफिकेशन
सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में बी. पी. सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में कहा कि गवर्नर को मनमाने ढंग से या केवल राजनीतिक वजह से नहीं हटाया जा सकता। नई सरकार आने के कारण सिर्फ गवर्नर को हटाना सही नहीं है।
इस प्रकार, गवर्नर की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया संविधान और केंद्र सरकार की सलाह के आधार पर होती है, लेकिन इसका इस्तेमाल राजनीतिक मनमानी के लिए नहीं किया जा सकता।
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