Last Updated Sep - 17 - 2025, 04:48 PM | Source : Fela News
मोदी ने विकास और राष्ट्रीयता के मुद्दों को आगे रखकर जातिगत सियासत की पकड़ को कमजोर किया। उनकी रणनीति ने परंपरागत वोट बैंक की राजनीति को चुनौती दी और नए राजनीतिक
भारतीय राजनीति में लंबे समय तक जाति का समीकरण ही चुनावी जीत-हार तय करता रहा। लालू यादव, मुलायम सिंह जैसे नेता इन्हीं आधारों पर दशकों तक राजनीति में दबदबा बनाए रहे। लेकिन नरेंद्र मोदी के दौर में यह समीकरण तेजी से बदलता दिखा है।
मोदी ने जाति की जगह विकास, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के एजेंडे को सामने रखकर नई पिच तैयार की। बीजेपी ने बड़ी चतुराई से हर जाति के छोटे-छोटे समूहों को जोड़ते हुए उन्हें व्यापक हिंदुत्व की छतरी के नीचे लाने की रणनीति अपनाई। नतीजा यह हुआ कि यादव, जाट, मराठा जैसी जातियों पर टिके क्षत्रपों की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर पड़ गई।
आज हालात यह हैं कि जातिगत राजनीति करने वाले नेता अपने परंपरागत वोट बैंक तक को बचाने में संघर्ष कर रहे हैं। मोदी का ये नया राजनीतिक मॉडल अब भारतीय सियासत में एक स्थायी बदलाव की तरह देखा जा रहा है।