Last Updated Feb - 13 - 2026, 12:56 PM | Source : Fela News
शहडोल में अवैध कोयला खनन रोकने पहुंची वन विभाग टीम पर माफियाओं ने हमला कर दिया। रेंजर से मारपीट की गई, जबकि घटना के 24 घंटे बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर हमला होने से इलाके में हड़कंप मच गया। सोहागपुर थाना क्षेत्र के खितौली बीट में हुई इस घटना में वन विभाग के रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा के साथ मारपीट की गई और उनके सरकारी काम में बाधा डाली गई। इस घटना ने न केवल अवैध खनन माफियाओं के बढ़ते हौसले को उजागर किया है, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बुधवार रात ग्राम उमरटोला के ग्रामीणों ने सूचना दी थी कि घोड़सूनाला क्षेत्र में वन भूमि से अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा है और ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए उसका परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए कोयले से भरी एक ट्रॉली को गांव के पास रोक लिया और इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक माफिया ट्रॉली से कोयला उतारकर फरार हो चुके थे।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने आरोपियों का पीछा करते हुए बरखेड़ा गांव की ओर रुख किया। आरोप है कि वहां मौजूद चिंटू सिंह परिहार, बिट्टन, महेश और उनके साथियों ने रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा को वाहन से उतारकर उनके साथ मारपीट की। इस दौरान उनकी शर्ट फाड़ दी गई और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। हमले के समय वन विभाग की वरिष्ठ अधिकारी डीएफओ श्रद्धा पेड्रो भी आसपास के क्षेत्र में मौजूद थीं, लेकिन माफियाओं ने रेंजर को निशाना बनाकर हमला किया।
डीएफओ श्रद्धा पेड्रो ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वन विभाग की टीम सरकारी कर्तव्य निभाने गई थी, लेकिन माफियाओं ने न केवल हमला किया बल्कि सरकारी कार्य में बाधा भी उत्पन्न की। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं है।
वहीं, सोहागपुर थाना प्रभारी अरुण पांडे ने कहा कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पीड़ित वन कर्मियों को बयान के लिए बुलाया गया है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना से ग्रामीणों में भी भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कोयला खनन और परिवहन का कारोबार चल रहा है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन को इसकी शिकायत दी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना दर्शाती है कि अवैध खनन माफिया कितने संगठित और बेखौफ हो चुके हैं। सरकारी अधिकारियों पर हमला कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और दोषियों को कब तक कानून के दायरे में लाया जाता है।
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