Last Updated Feb - 23 - 2026, 06:10 PM | Source : Fela News
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी को INDI गठबंधन की कमान छोड़ने की सलाह दी. बयान के बाद कांग्रेस और तृणमूल नेताओं में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के एक बयान ने विपक्षी INDI गठबंधन की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. अय्यर ने सार्वजनिक तौर पर यह सुझाव दिया है कि राहुल गांधी को गठबंधन की कमान किसी अन्य वरिष्ठ क्षेत्रीय नेता को सौंप देनी चाहिए. उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है.
अय्यर का कहना है कि INDI गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए नेतृत्व का विकेंद्रीकरण जरूरी है. उन्होंने सुझाव दिया कि ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन, अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव जैसे नेताओं को अधिक सक्रिय भूमिका दी जा सकती है. उनके मुताबिक, क्षेत्रीय दलों के नेताओं के पास अपने-अपने राज्यों में मजबूत जनाधार है और वे गठबंधन को अधिक समय और ऊर्जा दे सकते हैं.
उन्होंने कहा कि “ममता दीदी के बिना INDI गठबंधन की कल्पना अधूरी है" और संकेत दिया कि गठबंधन को ऐसे नेता की जरूरत है जो छोटे दलों के साथ बेहतर तालमेल बिठा सके. अय्यर का मानना है कि अगर नेतृत्व किसी क्षेत्रीय चेहरे के हाथ में होगा तो गठबंधन की स्वीकार्यता और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं.
हालांकि, अय्यर का यह बयान ऐसे समय आया है जब INDI गठबंधन पहले से ही कई राज्यों में राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते पहले से ही जटिल रहे हैं. ममता बनर्जी की हालिया राजनीतिक रणनीतियों को लेकर भी विपक्षी खेमे में अलग-अलग राय सामने आती रही है.
अय्यर के बयान पर कांग्रेस नेताओं ने दूरी बनाते हुए कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं. पश्चिम बंगाल कांग्रेस के महासचिव सुमन रॉय चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अय्यर लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं और उनका बयान पार्टी की नीति को प्रतिबिंबित नहीं करता. उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन से जुड़े फैसले सामूहिक चर्चा के बाद ही लिए जाते हैं.
तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, हालांकि पार्टी ने सीधे तौर पर किसी नेतृत्व परिवर्तन की मांग का समर्थन नहीं किया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी एकता की मजबूती काफी हद तक आपसी विश्वास और समन्वय पर निर्भर करेगी.
राहुल गांधी INDI गठबंधन के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं और कई संयुक्त विपक्षी बैठकों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं. ऐसे में अय्यर का सुझाव नेतृत्व शैली और रणनीति पर नए सिरे से चर्चा को जन्म दे सकता है.
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत राय बनकर रह जाता है या विपक्षी राजनीति में नेतृत्व संरचना को लेकर कोई व्यापक बहस छेड़ता है. फिलहाल इतना तय है कि इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है.
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