Last Updated Apr - 20 - 2026, 01:53 PM | Source : Fela News
Pakistani Bahu In India: जोधपुर में 15 साल का इंतजार खत्म हुआ, जब पाकिस्तान की डॉक्टर रक्षा सुथार का भव्य गृह प्रवेश हुआ; 2025 में नेपाल में शादी के बाद अब उन्हें वीजा मिला और वह अपने पति के साथ भारत में रह सकीं।
Jodhpur News: राजस्थान के जोधपुर के पाल क्षेत्र में सोमवार को ऐसा भावुक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जिसने 15 साल लंबे इंतजार का अंत कर दिया। पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए एक परिवार ने अपनी बहू का भव्य स्वागत किया। यह कहानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमित सुथार और पाकिस्तान की डॉक्टर रक्षा सुथार की है, जिनका रिश्ता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा।
इस रिश्ते की नींव साल 2011 से भी पहले रखी गई थी, जब अमित सुथार और उनके परिवार के पाकिस्तान में रहने के दौरान दोनों परिवारों ने अमित और रक्षा का रिश्ता तय किया था। लेकिन 2011 में बेहतर भविष्य की तलाश में अमित सुथार अपने पिता प्रदीप सुथार के साथ पाकिस्तान छोड़कर भारत के जोधपुर आ गए। परिवार तो भारत आ गया, लेकिन उनकी मंगेतर रक्षा पाकिस्तान में ही रह गईं। इसके बाद सरहद और वीजा की जटिलताओं ने दोनों को सालों तक अलग रखा।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों और वीजा प्रक्रिया की धीमी गति के कारण यह रिश्ता लंबे समय तक अधर में लटका रहा। इस दौरान अमित सुथार ने भारत में मेहनत कर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपना करियर बनाया, जबकि पाकिस्तान में रक्षा ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने का सपना साकार किया। लेकिन दोनों की जिंदगी में सबसे बड़ी चुनौती थी—सरहद के उस पार बसी एक अधूरी मुलाकात।
कई वर्षों तक प्रयासों के बावजूद जब भारत या पाकिस्तान का वीजा मिलना मुश्किल हो गया, तो दोनों परिवारों ने एक अनोखा और मानवीय रास्ता अपनाया। वर्ष 2025 में दोनों परिवारों ने नेपाल को ‘न्यूट्रल वेन्यू’ के रूप में चुना। 2 जून 2025 को अमित सुथार अपने परिवार के साथ जोधपुर से काठमांडू पहुंचे, जबकि रक्षा अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से नेपाल पहुंचीं। यहीं दोनों ने विवाह के बंधन में बंधकर सात फेरे लिए और अपने लंबे इंतजार को शादी में बदल दिया।
हालांकि शादी के बाद भी परिस्थितियां आसान नहीं रहीं। नियमों और वीजा प्रक्रियाओं के कारण अमित को भारत लौटना पड़ा, जबकि रक्षा को पाकिस्तान वापस जाना पड़ा। नवविवाहित जोड़े को शादी के तुरंत बाद करीब 10 महीने तक अलग रहना पड़ा, जो उनके लिए बेहद कठिन समय था। इस दौरान लगातार दस्तावेजी प्रक्रिया, दूतावासों के चक्कर और कानूनी औपचारिकताएं चलती रहीं।
आखिरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में राहत मिली। रक्षा सुथार को 45 दिनों का विजिटर वीजा जारी किया गया, जिससे वह भारत आ सकीं।
जैसे ही रक्षा जोधपुर के पाल स्थित अपने ससुराल पहुंचीं, पूरे घर में उत्सव का माहौल बन गया। वर्षों के इंतजार के बाद अपनी बहू को सामने देखकर सास-ससुर भावुक हो उठे और उनकी आंखों में आंसू छलक आए। परिवार ने रक्षा का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया।
पाक विस्थापितों के अधिकारों के लिए काम करने वाले गणेश बिजाणी ने बताया कि फिलहाल रक्षा विजिटर वीजा पर भारत में हैं, लेकिन जल्द ही उनके लिए दीर्घकालिक वीजा की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि वह स्थायी रूप से अपने पति के साथ भारत में रह सकें।
यह कहानी सिर्फ एक विवाह की नहीं, बल्कि सरहदों के बीच टूटे रिश्तों के 15 साल लंबे इंतजार की जीत है, जिसने एक बार फिर साबित किया कि प्रेम और धैर्य के आगे सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।
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