Last Updated Aug - 06 - 2025, 12:07 PM | Source : Fela News
Dharali Cloudburst News: पहाड़ी इलाकों में बादल फटना इसलिए ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि वहां पानी रुक नहीं पाता।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में सोमवार रात बादल फटने से भारी तबाही हुई। तेज बारिश और बाढ़ के पानी ने घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया। वीडियो में दिखा कि पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और पेड़-पौधे भी बहकर आ रहे हैं।
क्या है बादल फटना?
मौसम विशेषज्ञ महेश पहलावत के मुताबिक, अगर किसी जगह एक घंटे में 100 मिलीमीटर या उससे ज्यादा बारिश हो, तो उसे बादल फटना कहा जाता है। यह मैदानी इलाकों में भी हो सकता है, लेकिन पहाड़ों में इसका असर ज्यादा खतरनाक होता है।
पहाड़ों में क्यों ज्यादा खतरनाक?
पहाड़ी इलाकों में पानी रुकता नहीं है और ढलानों के कारण तेजी से बहकर नदियों में मिल जाता है। इससे नदी का बहाव तेज हो जाता है और वह मिट्टी, पत्थर और मलबा बहा ले जाती है, जिससे बड़ी तबाही होती है।
भारी बारिश की वजह
अभी उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश का कारण "मानसून टर्फ" का तराई क्षेत्रों की ओर आना है। इससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं पहाड़ों में आती हैं, जिससे बादल बनते हैं और फटने की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह की स्थिति 2013 के केदारनाथ हादसे में भी बनी थी।
रेस्क्यू में मुश्किलें
अगले 12 घंटे तक कई जगहों पर तेज बारिश जारी रह सकती है, जिससे बचाव कार्य प्रभावित होंगे। कल से बारिश थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन 12 अगस्त से फिर भारी बारिश की संभावना है, जिससे भूस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसलिए अगले 3-4 दिनों में रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से पूरे करने होंगे।
फिलहाल उत्तरकाशी में बचाव कार्य जारी है और प्रशासन अलर्ट पर है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और नदियों या संवेदनशील क्षेत्रों में न जाएं।
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