Last Updated Feb - 16 - 2026, 11:52 AM | Source : Fela News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुंबई में अहम बैठक करेंगे. रक्षा, AI, व्यापार और नवाचार सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौ
भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुंबई में होने वाली मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे और इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, व्यापार और नवाचार जैसे प्रमुख में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा.
मुंबई में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-फ्रांस संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और भविष्य के सहयोग के नए रास्ते तलाशना है. दोनों नेता लोक भवन में आमने-सामने बातचीत करेंगे, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता, ऊर्जा साझेदारी और उभरती तकनीकों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं.
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही काफी मजबूत है और आने वाले समय में इसे और विस्तार देने की तैयारी है. फ्रांस भारत के प्रमुख रक्षा साझेदारों में से एक है और दोनों देशों के बीच आधुनिक हथियार प्रणाली, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में नई परियोजनाओं और संयुक्त विकास कार्यक्रमों पर भी चर्चा हो सकती है, जिससे भारत की सैन्य क्षमता को और मजबूती मिलेगी.
तकनीकी और डिजिटल क्षेत्र भी इस बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल इनोवेशन और स्टार्ट-अप सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं. इसी दिशा में भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 की शुरुआत की जाएगी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के वैज्ञानिकों, उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ाना है. इस पहल से नए शोध, तकनीकी विकास और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
आर्थिक दृष्टि से भी यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. फ्रांस भारत में निवेश बढ़ाने और नई औद्योगिक परियोजनाओं में भागीदारी करने में रुचि दिखा रहा है. वहीं भारत भी फ्रांस के साथ व्यापार और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना चाहता है. इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक प्रभाव भी पड़ सकता है. यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. इस बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिलेगा कि भारत और फ्रांस भविष्य में एक मजबूत, भरोसेमंद और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
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