Last Updated Nov - 27 - 2025, 04:22 PM | Source : Fela News
शुक्राचार्य और कच की पौराणिक कथा के आधार पर शादी में शराब निषेध की परंपरा प्रचलित है।
शादी-ब्याह का मौसम आते ही कई जगहों पर शराब न पीने की परंपरा याद दिलाई जाती है। लोग मानते हैं कि ऐसा धार्मिक कारणों से कहा जाता है, लेकिन इसकी जड़ें एक पौराणिक कथा से जुड़ी बताई जाती हैं। मान्यता है कि शुक्राचार्य के शाप के कारण ब्राह्मणों और कई समुदायों में मदिरा सेवन को गलत माना गया। कहा जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष के समय संजीवनी विद्या का रहस्य जानने के लिए देवताओं ने कच को शुक्राचार्य के पास भेजा था। यही कहानी इस प्रथा की वजह मानी जाती है।
कथा के अनुसार, असुरों ने कच को कई बार मार दिया, लेकिन शुक्राचार्य ने अपनी विद्या से उसे जीवित कर दिया। बाद में, असुरों ने कच को मारकर उसकी राख को ही शुक्राचार्य को पिलाकर खत्म करने की कोशिश की। जब कच को वापस जीवित करना था, तो शुक्राचार्य को महसूस हुआ कि यदि संजीवनी विद्या का प्रयोग किया गया तो कच उनके शरीर को फाड़कर बाहर आएगा और उनकी मृत्यु हो जाएगी। यही हुआ—कच जीवित तो हो गया, लेकिन शुक्राचार्य की जान चली गई। कच ने भी विद्या सीखकर उन्हें दोबारा जीवित किया।
इसी घटना से जुड़ा है वह शाप, जिसमें कहा जाता है कि जिसने भी किसी की राख शराब के साथ ग्रहण की, उसके लिए मदिरा हमेशा विनाशकारी होगी। इसी मान्यता के आधार पर कई समुदाय खासकर शादी जैसे शुभ अवसरों पर शराब से दूरी बनाने को सही मानते हैं। यह प्रथा समय के साथ धार्मिक और सामाजिक नियम बन चुकी है, जिसे आज भी कई परिवार निभाते हैं।
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