Last Updated Feb - 25 - 2026, 04:10 PM | Source : Fela News
एनसीईआरटी की किताब के एक अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नाराजगी जताई गई। रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका की छवि खराब करने पर सख्त टिप्पणी की।
एनसीईआरटी की एक पुस्तक के अध्याय को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने इस मामले को गंभीर बताते हुए स्पष्ट किया कि संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
बताया जा रहा है कि मामला एनसीईआरटी की पुस्तक में शामिल सामग्री से जुड़ा है, जिस पर आपत्ति जताई गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह संकेत दिया कि यदि किसी सामग्री में न्यायपालिका की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसकी विश्वसनीयता पर किसी भी प्रकार का आघात स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि संस्थानों के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
इस बीच अदालत में यह मुद्दा भी उठा कि शैक्षणिक सामग्री तैयार करते समय तथ्यों की शुद्धता और संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक न्यायालय ने संकेत दिया कि संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा जा सकता है।
वहीं दूसरी ओर सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी संस्था या व्यवस्था को अनुचित तरीके से प्रस्तुत करना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
कुल मिलाकर इस मामले में सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणी ने यह संदेश दिया है कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को लेकर अदालत गंभीर है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी। आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े तथ्यों पर विस्तृत विचार होने की संभावना बताई गई है।
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