Last Updated Feb - 21 - 2026, 05:53 PM | Source : Fela News
मेरठ में 70 करोड़ रुपये के फर्जी GST लेन-देन का पर्दाफाश हुआ है। पंजाब के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस अब बड़े टैक्स चोरी नेटवर्क की जांच कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में जीएसटी फ्रॉड का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने टैक्स चोरी के संगठित नेटवर्क को उजागर कर दिया है। मेरठ क्राइम ब्रांच ने इस मामले में पंजाब के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 70 करोड़ रुपये का कागजी लेन-देन दिखाकर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई फर्जी फर्म बनाई और उनके जरिए बिना किसी वास्तविक माल या सेवा के केवल कागजों में व्यापार दिखाया। इस तरह उन्होंने करीब 7 करोड़ रुपये का जीएसटी फ्रॉड किया और टैक्स सिस्टम का दुरुपयोग किया। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें फर्जी दस्तावेज और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी गुरदीप सिंह और धर्मेंद्र कुमार के रूप में हुई है। दोनों को पुलिस ने 19 फरवरी 2026 को मंडी गोविंदगढ़ स्थित उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके पास से दो लैपटॉप और चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनमें महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मौजूद होने की संभावना है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर कंपनियां बनाई थीं। इसके बाद उन्होंने इन कंपनियों के नाम पर नकली बिल जारी किए और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत फायदा उठाया। इतना ही नहीं, उन्होंने फर्जी ई-वे बिल बनाए, गलत एचएसएन कोड का इस्तेमाल किया और कागजों में निर्यात दिखाकर जीएसटी रिफंड भी हासिल किया। इस तरह पूरी प्रक्रिया केवल दस्तावेजों तक सीमित थी और वास्तविक व्यापार नहीं हुआ था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने कंपनियों के बीच सर्कुलर ट्रेडिंग का सहारा लिया, जिससे लेन-देन वास्तविक दिखाई दे और टैक्स अधिकारियों को शक न हो। शुरुआती जांच में कुल फर्जी लेन-देन की राशि लगभग 69 करोड़ 99 लाख रुपये पाई गई है। यह मामला जीएसटी सिस्टम में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर की गई एक संगठित टैक्स चोरी का उदाहरण माना जा रहा है।
मेरठ पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। बरामद किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोन से डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है, जिससे अन्य सहयोगियों और फर्जी कंपनियों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। यह मामला न केवल टैक्स चोरी का गंभीर उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि फर्जी कंपनियों के जरिए किस तरह सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
इस खुलासे के बाद जीएसटी विभाग और पुलिस दोनों ही सतर्क हो गए हैं और ऐसे फर्जी नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।
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