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UGC के नए नियमों की तुलना रॉलेट एक्ट से हो

UGC के नए नियमों की तुलना रॉलेट एक्ट से हो

Last Updated Jan - 27 - 2026, 04:42 PM | Source : Fela News

UGC के नए इक्विटी और रेगुलेशन नियमों को लेकर राजनीतिक और अकादमिक हलकों में बहस तेज है। कुछ संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा इन नियमों की तुलना ब्रिटिश काल के रॉलेट
UGC के नए नियमों की तुलना रॉलेट एक्ट से हो
UGC के नए नियमों की तुलना रॉलेट एक्ट से हो

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित नए इक्विटी और रेगुलेशन नियमों को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। कई शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि ये नियम विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को सीमित कर सकते हैं। इसी क्रम में कुछ आलोचक इन नियमों की तुलना ब्रिटिश शासन के समय लागू किए गए रॉलेट एक्ट से कर रहे हैं, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि UGC के नए नियमों के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने और निर्णय प्रक्रिया में आयोग की भूमिका बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। आलोचकों का तर्क है कि इससे शिक्षण संस्थानों की स्वतंत्र निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है और असहमति या विरोध के स्वर को दबाने की आशंका पैदा होती है। छात्र संगठनों का कहना है कि नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका दुरुपयोग संभव है।

इस तुलना के संदर्भ में रॉलेट एक्ट का उल्लेख किया जा रहा है, जिसे ब्रिटिश सरकार ने 1919 में लागू किया था। इस कानून के तहत बिना मुकदमा चलाए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लंबे समय तक हिरासत में रखने का अधिकार प्रशासन को मिल गया था। उस समय इसे नागरिक स्वतंत्रताओं पर सीधा हमला माना गया था और देशभर में इसके खिलाफ व्यापक विरोध हुआ था। महात्मा गांधी के नेतृत्व में रॉलेट सत्याग्रह इसी कानून के विरोध में शुरू हुआ था।

वहीं दूसरी ओर UGC और केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। प्रशासन का कहना है कि इन प्रावधानों से शैक्षणिक संस्थानों में बेहतर शासन व्यवस्था विकसित होगी और छात्रों तथा शिक्षकों के हित सुरक्षित रहेंगे। UGC के अनुसार इन नियमों को ऐतिहासिक कानूनों से जोड़कर देखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

इस बीच शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रॉलेट एक्ट और UGC के नियमों की प्रकृति और संदर्भ अलग हैं, लेकिन तुलना इस बात की ओर संकेत करती है कि उच्च शिक्षा में स्वतंत्रता और नियमन के संतुलन को लेकर चिंता बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और चर्चा तथा कानूनी समीक्षा की संभावना जताई जा रही है।

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