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सुप्रीम कोर्ट में UGC नियमों के खिलाफ याचिका दाखिल विवाद बहस बढ़ी

सुप्रीम कोर्ट में UGC नियमों के खिलाफ याचिका दाखिल विवाद बहस बढ़ी

Last Updated Jan - 27 - 2026, 04:36 PM | Source : Fela News

UGC के 2026 इक्विटी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है, जिससे विवाद और तेज हो गया है। याचिकाकर्ता ने कुछ प्रावधानों को असं
सुप्रीम कोर्ट में UGC नियमों के खिलाफ याचिका दाखिल विवाद बहस बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट में UGC नियमों के खिलाफ याचिका दाखिल विवाद बहस बढ़ी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिससे विवाद व्यापक रूप से उभर रहा है। याचिका में मुख्य रूप से नियम के Section 3(C) को असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है, तथा इस प्रावधान को हटाने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियम 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और यह UGC अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा है कि यह नियम कुछ वर्गों को उच्च शिक्षा से बाहर कर सकता है तथा सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों को कमजोर कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध है कि वह इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता की विस्तृत समीक्षा करे और छात्रों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।

इस बीच छात्र और शिक्षक संगठनों द्वारा भी UGC के इन नियमों का विरोध जारी है। देशभर के विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, और सोशल मीडिया पर #RollbackUGC जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि नियम कुछ हिस्सों में एकतरफा और भेदभावपूर्ण हैं तथा इससे सामान्य वर्ग के छात्रों को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

UGC का पक्ष यह है कि नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना और एक सुरक्षित व समान वातावरण सुनिश्चित करना है। आयोग ने कहा है कि भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में पिछले वर्षों में वृद्धि देखी गई है, और इसी को ध्यान में रखते हुए यह नियम बनाए गए हैं। आयोग का कहना है कि निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था के बिना समानता को साकार करना संभव नहीं है।

इस विवाद के चलते बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया, जिसे कई स्थानों पर “काले कानून” जैसा बताया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई और नियमों की वैधता पर फैसला आने के बाद ही भविष्य में इसका लागू होना या संशोधन तय होगा। फिलहाल यह मामला देश के शिक्षा नीति और न्यायिक समीकरण के बीच एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन चुका है।

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