Last Updated Jan - 27 - 2026, 04:32 PM | Source : Fela News
UGC के नए इक्विटी नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज है। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही नियमों पर उठे सवालों और आपत्तियों पर अपना पक्ष रखेगा।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। छात्र संगठनों, शिक्षकों और कुछ सामाजिक समूहों ने इन नियमों को लेकर आपत्ति जताई है और इन्हें वापस लेने की मांग की जा रही है। सोशल मीडिया पर #RollbackUGC जैसे हैशटैग के साथ विरोध तेज हुआ है, वहीं कुछ हलकों में इन नियमों को “काला कानून” बताया जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच अब शिक्षा मंत्रालय के जल्द स्पष्टीकरण देने की बात सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार शिक्षा मंत्रालय UGC के नए नियमों को लेकर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं का विस्तृत जवाब तैयार कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, भेदभाव की रोकथाम और एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है। प्रशासन का कहना है कि इन प्रावधानों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और इनका मकसद किसी वर्ग विशेष के अधिकारों को सीमित करना नहीं है।
विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका दायरा बहुत व्यापक है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इन नियमों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि नियमों की भाषा स्पष्ट न होने से उनके दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक बताया गया है।
वहीं दूसरी ओर UGC और मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का तर्क है कि पिछले वर्षों में उच्च शिक्षा परिसरों में भेदभाव से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं। बताया जा रहा है कि इन्हीं अनुभवों के आधार पर निगरानी और शिकायत निवारण की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि नियमों को लागू करने से पहले सभी कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार किया गया है।
इस बीच शिक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह जल्द ही सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करेगा और यह बताएगा कि नियमों का उद्देश्य क्या है और उन्हें लेकर फैली भ्रांतियों का समाधान कैसे किया जाएगा। माना जा रहा है कि मंत्रालय के जवाब के बाद ही इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय होगी।
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