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इजराइल पहुंचे पीएम मोदी, 'हेक्सागन अलायंस' से बदलेंगे रणनीतिक समीकरण

इजराइल पहुंचे पीएम मोदी, 'हेक्सागन अलायंस' से बदलेंगे रणनीतिक समीकरण

Last Updated Feb - 25 - 2026, 05:48 PM | Source : Fela News

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे में रक्षा, तकनीक और प्रस्तावित 'हेक्सागन अलायंस' पर अहम चर्चा होगी। भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
इजराइल पहुंचे पीएम मोदी
इजराइल पहुंचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजराइल दौरा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति में भारत की सक्रिय भूमिका का संकेत माना जा रहा है। दो दिवसीय इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होगी, जिसमें रक्षा सहयोग, उन्नत तकनीक, व्यापार, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे। 

इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा जिस विषय को लेकर है, वह है प्रस्तावित 'हेक्सागन अलायंस'। यह एक बहुपक्षीय रणनीतिक ढांचा बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य समान सोच वाले देशों को एक मंच पर लाकर सुरक्षा, आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है। 

माना जा रहा है कि इस गठबंधन के जरिए इजराइल, यूरोप और एशिया के कुछ प्रमुख देशों के साथ मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना चाहता है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता और उभरती चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना कर सके। भारत को इसमें एक अहम भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। 

भारत और इजराइल के रिश्ते पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं। रक्षा क्षेत्र में इजराइल भारत के प्रमुख साझेदारों में शामिल है। मिसाइल सिस्टम, ड्रोन टेक्नोलॉजी, निगरानी उपकरण और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ा है। पीएम मोदी की यह यात्रा इन सहयोगों को और विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कुछ नए समझौतों और तकनीकी साझेदारी पर भी चर्चा संभव है। 

तकनीक और नवाचार भी इस यात्रा का प्रमुख एजेंडा है। इजराइल को स्टार्टअप और हाई-टेक इनोवेशन का वैश्विक केंद्र माना जाता है, जबकि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा उत्पादन में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। इस यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। 

कूटनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा अहम है। पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और वैश्विक शक्ति संतुलन के बदलते समीकरणों के बीच भारत संतुलित और बहुपक्षीय कूटनीति पर जोर देता रहा है। इजराइल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए भारत ने क्षेत्र के अन्य देशों से भी संवाद कायम रखा है। ऐसे में हेक्सागन अलायंस' जैसे प्रस्ताव भारत की विदेश नीति के लिए एक नया आयाम जोड़ सकते हैं, हालांकि इसके संभावित भू-राजनीतिक प्रभावों पर भी नजर रहेगी। 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को भी मजबूती देगा। रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और संभावित बहुपक्षीय गठबंधन के जरिए भारत अपनी भूमिका एक जिम्मेदार और प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 

आने वाले दिनों में इस यात्रा से जुड़े समझौते और घोषणाएं सामने आएंगी, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि भारत और इजराइल की साझेदारी किस नई ऊंचाई तक पहुंचने वाली है। फिलहाल यह दौरा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। 

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