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प्रोजेक्ट कुशा: भारत का देसी S-400 कब होगा तैयार, कितनी ताकतवर होगी ये ढाल?

प्रोजेक्ट कुशा: भारत का देसी S-400 कब होगा तैयार, कितनी ताकतवर होगी ये ढाल?

Last Updated Mar - 30 - 2026, 05:19 PM | Source : Fela News

भारत का स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम ‘प्रोजेक्ट कुशा’ तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसे फिलहाल S-400 के साथ काम करने और भविष्य में उसका विकल्प बनने के रूप में देखा जा रहा है.
भारत का देसी S-400 कब होगा तैयार
भारत का देसी S-400 कब होगा तैयार

भारत का स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम “प्रोजेक्ट कुशा” अब तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश की सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है. भारतीय वायु सेना (IAF) ने इसकी पांच स्क्वाड्रन खरीद को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद यह प्रोजेक्ट शुरुआती प्रोडक्शन के अहम चरण में पहुंच चुका है. इस पूरी डील की अनुमानित कीमत करीब 21,700 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 2026 की शुरुआत में M1 इंटरसेप्टर मिसाइल के शुरुआती फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं. इस मिसाइल में डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर लगाया गया है, जो इसे अंतिम चरण में ज्यादा तेज और सटीक हमला करने की क्षमता देता है. M1 मिसाइल की रेंज लगभग 150 किलोमीटर है और इसे 2026 के अंत तक बड़े स्तर पर यूजर ट्रायल के लिए तैयार किया जा रहा है.

इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि टेस्टिंग के साथ-साथ प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया गया है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) शुरुआती मिसाइल और ग्राउंड सिस्टम तैयार कर रही हैं. इससे साफ है कि सेना को इस सिस्टम की तुरंत जरूरत है और स्वदेशी तकनीक पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है.

प्रोजेक्ट कुशा में आधुनिक और एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसमें मल्टी-फंक्शन कंट्रोल रडार (MFCR), बैटल मैनेजमेंट रडार और मोबाइल लॉन्च यूनिट्स शामिल हैं. यह सिस्टम सीधे IACCS नेटवर्क से जुड़ा होगा, जिससे रियल टाइम में जानकारी साझा कर तेजी से कार्रवाई करना संभव होगा.

रणनीतिक रूप से प्रोजेक्ट कुशा को रूस के S-400 सिस्टम के साथ मिलकर काम करने और भविष्य में उसका विकल्प बनने के रूप में देखा जा रहा है. यह सिस्टम विदेशी तकनीक के मुकाबले सस्ता है और इसमें सॉफ्टवेयर से लेकर अपग्रेड तक पूरी तरह भारत का नियंत्रण रहेगा. ड्रोन अटैक, स्टेल्थ तकनीक और एक साथ कई मिसाइल हमलों जैसे आधुनिक खतरों को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया गया है.

प्रोजेक्ट कुशा को तीन लेयर में डिजाइन किया गया है. M1 (150 किमी) फाइटर जेट, ड्रोन और क्रूज मिसाइल को रोकने के लिए है. M2 (250 किमी) स्टेल्थ एयरक्राफ्ट और तेज खतरों के लिए होगा, जिसका टेस्ट 2027 तक होने की उम्मीद है. वहीं M3 (350-400 किमी) बड़े लक्ष्यों जैसे AWACS और एयर टैंकर के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसका टेस्ट 2028 तक संभव है.

इस सिस्टम की सिंगल शॉट किल क्षमता 80% से ज्यादा बताई जा रही है. कुल मिलाकर, प्रोजेक्ट कुशा भारत को मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर एयर डिफेंस सिस्टम देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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