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बंगाल में तीसरे मोर्चे की आहट, ओवैसी संग संकेत हुमायूं।

बंगाल में तीसरे मोर्चे की आहट, ओवैसी संग संकेत हुमायूं।

Last Updated Feb - 03 - 2026, 06:22 PM | Source : Fela News

TMC से अलग हुए हुमायूं कबीर ने लेफ्ट, कांग्रेस, ISF और AIMIM को साथ आने का न्योता दिया। 15 फरवरी तक गठबंधन तस्वीर साफ होने के संकेत दिए।
बंगाल में तीसरे मोर्चे की आहट
बंगाल में तीसरे मोर्चे की आहट

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर जनता उन्नयन पार्टी (JUP) बनाने वाले पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य में एक मजबूत तीसरे मोर्चे की संभावना को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है। उन्होंने लेफ्ट दलों, कांग्रेस, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को साथ आने का न्योता देकर सियासी समीकरणों में नई चर्चा छेड़ दी है। 

हुमायूं कबीर ने संकेत दिए हैं कि AIMIM के साथ संभावित गठबंधन को लेकर तस्वीर 15 फरवरी तक साफ हो सकती है। उनका कहना है कि बंगाल की राजनीति अब ऐसे मोड़ पर है, जहां मतदाताओं को TMC और BJP के अलावा एक वैकल्पिक मंच चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने विभिन्न दलों को एक मंच पर आने का आह्वान किया है। 

कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने लेफ्ट, कांग्रेस, ISF और AIMIM सभी से संवाद शुरू किया है। उनका दावा है कि कई दल इस पहल को सकारात्मक रूप से देख रहे हैं, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। हाल ही में उन्होंने कोलकाता में लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन मोहम्मद सलीम से भी मुलाकात की, जिससे इस पहल को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। 

सूत्रों के अनुसार, लेफ्ट, कांग्रेस और ISF फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन संवाद के रास्ते खुले हैं। ये दल अभी किसी भी सार्वजनिक मंच पर JUP के साथ खड़े होने से बच रहे हैं, पर अंदरूनी बातचीत जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन आकार लेता है तो यह बंगाल की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बना सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां अल्पसंख्यक वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 

हुमायूं कबीर ने 15 फरवरी तक गठबंधन के दरवाजे खुले रखने की बात कही है। उनका कहना है कि जो भी दल BJP और TMC दोनों के खिलाफ लड़ना चाहता है, वह इस मंच का हिस्सा बन सकता है। इस बीच, 11 फरवरी को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण से जुड़ा एक कार्यक्रम प्रस्तावित है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की बात कही जा रही है। कबीर इसे अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं। 

इस घटनाक्रम ने बंगाल में तीसरे मोर्चे की बहस को फिर से जीवित कर दिया है। लंबे समय से राज्य की राजनीति TMC बनाम BJP के ध्रुवीकरण के बीच सिमटी रही है, जबकि लेफ्ट और कांग्रेस हाशिए पर दिखे हैं। ऐसे में JUP की यह पहल उन दलों के लिए एक नया मंच बन सकती है, जो अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को फिर से स्थापित करना चाहते हैं। 

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी भी गठबंधन के लिए वैचारिक सहमति, सीट बंटवारा और नेतृत्व जैसे मुद्दे बड़ी चुनौती होंगे। AIMIM की संभावित भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अलग-अलग राय है। कुछ इसे अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे तीसरे विकल्प की तलाश मान रहे हैं। 

फिलहाल, सभी की नजरें 15 फरवरी पर टिकी हैं। यदि इस तारीख तक कोई ठोस घोषणा होती है, तो बंगाल की चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ सकता है। हुमायूं कबीर की यह पहल केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है या वास्तविक राजनीतिक गठबंधन का रूप लेती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। 

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