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गुरुग्राम केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, 3 महिला IPS को जांच, पुरानी टीम पर नोटिस

गुरुग्राम केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, 3 महिला IPS को जांच, पुरानी टीम पर नोटिस

Last Updated Mar - 26 - 2026, 12:55 PM | Source : Fela News

पीड़िता के बयान को नजरअंदाज कर कमजोर रिपोर्ट तैयार करने पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि लापरवाही के लिए उन्हें पद से क्यों न हटाया जाए।
गुरुग्राम केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त
गुरुग्राम केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त

गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। पीड़िता के माता-पिता ने याचिका दायर कर जांच में देरी, बार-बार बच्ची को परेशान करने और कमजोर धाराएं लगाने की शिकायत की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

3 महिला IPS को सौंपी जांच

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। इस टीम में तीन महिला आईपीएस अधिकारी—कला रामचंद्रन, जसलीन कौर और अंशु सिंगला शामिल हैं। कोर्ट ने इन अधिकारियों को निष्पक्ष और तेज जांच करने का निर्देश दिया है।

चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों को भी नोटिस जारी किया है। आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के बयान को नजरअंदाज कर मामले का कमजोर ब्यौरा तैयार किया। कोर्ट ने पूछा है कि इस लापरवाही के लिए उन्हें पद से क्यों न हटाया जाए।

डॉक्टर पर भी उठे सवाल

मामले में मैक्स हॉस्पिटल की एक डॉक्टर को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि पहले रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि करने के बाद डॉक्टर ने अपना बयान बदल लिया था, जिससे जांच प्रभावित हुई।

सुनवाई में सामने आई गंभीर बातें

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जांच के नाम पर बच्ची को बार-बार पुलिस स्टेशन, अस्पताल और अन्य जगहों पर ले जाया गया। पुलिसकर्मी वर्दी में उसके पास आते रहे और उससे बार-बार पूछताछ की गई। यहां तक कि आरोपियों की पहचान के लिए बच्ची को उनके सामने खड़ा किया गया, जबकि यह प्रक्रिया फोटो के जरिए भी की जा सकती थी।

कोर्ट ने इस पूरे व्यवहार को असंवेदनशील बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि एक छोटी बच्ची के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद चिंताजनक है।

पहले की सुनवाई में क्या हुआ

20 मार्च को वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने यह मामला कोर्ट के सामने रखा था। उन्होंने बताया कि कई आरोपी होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं हो रही थी। इसके बाद कोर्ट ने 23 मार्च को सुनवाई तय की। इस दौरान कुछ गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

आगे की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को भी तलब किया था और पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी थी। अब केस की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

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