Last Updated Jan - 28 - 2026, 10:23 AM | Source : Fela News
यूजीसी नियमों के विरोध से शुरू हुआ विवाद इस्तीफे, बंधक बनाने के आरोप और राजनीतिक बयानबाज़ी तक पहुंचा। जानिए अलंकार अग्निहोत्री प्रकरण की पूरी टाइमलाइन |
उत्तर प्रदेश के बरेली से सामने आया नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का मामला बीते कुछ दिनों से प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। यूजीसी के नए नियमों के विरोध, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम और फिर अचानक दिए गए इस्तीफे ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है।
प्रांतीय प्रशासनिक सेवा ( PCS) 2019 बैच के अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी को ईमेल के जरिए अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को "काला कानून" बताते हुए आरोप लगाया कि ये कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुंचाएंगे और समाज को विभाजित करेंगे।
अग्निहोत्री ने कहा कि हाल के दिनों में दो घटनाओं ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। पहली, प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ कथित बदसलूकी और दूसरी, यूजीसी के नए नियम, जिन्हें वह शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक मानते हैं। उनके अनुसार, जब सरकारें ऐसी नीतियां अपनाती हैं जो समाज को बांटती हैं, तो उन्हें जगाना ज़रूरी हो जाता है।
इस्तीफे के बाद मामला और गंभीर तब हो गया जब अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जिलाधिकारी के आवास पर करीब 45 मिनट तक "बंधक" बनाकर रखा गया, गालियां दी गईं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें दो घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद वह अपनी जान बचाकर वहां से निकले।
हालांकि, इन आरोपों को जिला प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि अग्निहोत्री उनसे मिलने स्वयं आए थे और उस समय वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। किसी तरह की बदसलूकी या बंधक बनाने की घटना नहीं हुई। अपर जिलाधिकारी देश दीपक सिंह ने भी कहा कि बातचीत पूरी तरह सामान्य थी और अग्निहोत्री को केवल यह सलाह दी गई थी कि यदि वह मानसिक तनाव में हैं तो कुछ दिन की छुट्टी ले लें।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गईं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे प्रशासनिक दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश डर से नहीं, संविधान से चलना चाहिए और एक अधिकारी का इस तरह इस्तीफा देना गंभीर संकेत है।
वहीं, बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम ने यूजीसी नियमों में "कुछ कमियों" की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें दूर करने की कोशिश की जाएगी, हालांकि उन्होंने इस्तीफे पर सीधी टिप्पणी से बचते हुए कहा कि पहले अग्निहोत्री से बातचीत जरूरी है।
अलंकार अग्निहोत्री का मामला अब सिर्फ एक इस्तीफा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक स्वतंत्रता, नीतिगत असहमति और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार, प्रशासन और यूजीसी इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इस पूरे प्रकरण से कोई ठोस निष्कर्ष निकल पाता है।
यह भी पढ़े